महासमुंद : महिला किसान वर्ष के अवसर पर महिला किसान सेवा महाकुंभ का आयोजन
यह आयोजन कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, नेतृत्व क्षमता एवं तकनीकी दक्षता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषि एवं ग्रामीण विकास में महिला किसानों की महत्वपूर्ण भुमिका को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से महिला किसानों पर विशेष ध्यान दिए जाने की पहल के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में महिला किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों की जानकारी प्रदाय की गई।
कार्यक्रम के दौरान महिला कृषकों को लगभग 350 नग नींबू, अमरूद, आंवला, जामुन, कटहल, एवं अन्य फलदार पौध का वितरण किया गया। साथ ही केन्द्र परिसर का अवलोकन कराया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत महासमुंद हुलसी चन्द्राकर, कार्यक्रम के आयोजक उप संचालक कृषि श्री एफ आर कश्यप, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केन्द्र, भलेसर, महासमुंद डाॅ आर एल शर्मा एवं जिला जनसंपर्क अधिकारी, पोषण साहू उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से अधिक से अधिक महिला किसानों ने सहभागिता दी।
मुख्य अतिथि हुलसी चंद्राकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि महिला किसान फसल उत्पादन, बीज संरक्षण, पशुपालन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महिलाओं को नवीन कृषि तकनीकों, प्रशिक्षण एवं वैज्ञानिक मार्गदर्शन से जोडना कृषि विकास को गति देने के साथ-साथ उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढाने में भी सहायक है। वर्तमान समय में केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि कृषि आधारित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से आय में वृद्धि करना भी आवश्यक है।
उन्हांेने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार वर्ष 2026 को महिला किसानों के नाम समर्पित किया गया है। यह खेती किसानी में लगे महिलाओं की श्रम का सच्चा सम्मान है। उन्होंने महिला किसानों को विभिन्न आजीविका आधारित गतिविधि के लिए प्रोत्साहित किया एवं सम्मानित भी किया।
कृषि उप संचालक एफ. आर. कश्यप ने कार्यक्रम में फलों एवं सब्जियों की उन्नत खेती, आगामी रबी दलहनी फसलों की उन्नत खेती, मृदा स्वास्थ्य हेतु केंचुआ खाद की उपयोगिता, कृषि में यंत्रीकरण का उपयोग एवं महत्व, रबी तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, फसलों में रोग प्रबंधन, मशरूम उत्पादन तकनीक, कृषि में देशी किस्मों का महत्व जैसे विषयों पर जानकारी दी। किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान डाॅ आर. एल शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख ने दलहन, तिलहन कृषि की उपयोगिता, मृदा स्वास्थ, उन्नत कृषि तकनीक, प्राकृतिक खेती, फसल विविधिकरण, समसामयिक कृषि समस्याओं प्रमुख रूप से दलहन, तिलहन मे आने वाले रोग एवं उनके समय पर नियंत्रण के सटिक उपाय तथा कृषि आधारित आय के विभिन्न स्त्रोतों पर जानकारी दी।
इसके पश्चात् उप संचालक कृषि, फागूराम कश्यप के द्वारा आत्मनिर्भरता दलहन मिशन योजनांतर्गत भारत में दलहन एवं तिलहन फसल को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता को कम करने हेतु विभागीय योजनाओं की जानकारी कृषकों के बीच साझा की।
कार्यक्रम के अंतर्गत महिला किसानों के अनुभव साझा करने हेतु विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें महिला किसानों के कृषि क्षेत्र में योगदान, नवाचारों एवं उपलब्धियों को प्रोत्साहित किया गया। क्षेत्र से आए महिला किसानों ने अपनी सफलता की कहानी सुनाते हुए अन्य किसानों को भी मशरूम उत्पादन, जैविक खाद निर्माण, पशुपालन आदि के लिए प्रोत्साहित किया गया।
ग्राम कसेकेरा की महिला किसान रूखमणी चंद्राकर ने बताया कि वे करीब 10 सालों से जैविक खाद का निर्माण कर रहे हैं। जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है। इसी तरह सरायपाली की महिला किसान ने बताया कि मशरूम के उत्पादन से वे अब आत्मनिर्भर बन चुकी है। बाजार में इसकी अच्छी मांग है।
कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा किसानों से वैज्ञानिक कृषि को अपनाने तथा उपलब्ध कृषि तकनीकों का अधिकतम लाभ उठाकर सतत कृषि विकास एवं किसान कल्याण में सहभागी बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन डाॅ. साकेत दुबे, विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यानिकी) द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डाॅ विवेक स्वर्णकार, डाॅ कुणाल चन्द्राकर, डाॅ. रवीश केशरी, डा.ॅ डिप्रोशन बंजारा, डाॅ. शिल्पा लकरा, डाॅ. समरथ बघेल एवं कमलकांत लोधी तथा कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग, महासमुंद एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।