छत्तीसगढ़ की लोककलाओं को डिजिटल मंचों के जरिए दुनिया तक पहुंचाएं, राज्यपाल रमेन डेका, खैरागढ़ विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस पर दिया संदेश
रायपुर। छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककलाओं और जनजातीय संस्कृति को आधुनिक तकनीक से जोड़कर वैश्विक पहचान दिलाने की जरूरत है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति रमेन डेका ने खैरागढ़ स्थित राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस समारोह में यह बात कही। उन्होंने कहा कि मोबाइल, इंटरनेट और डिजिटल मीडिया के जरिए प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
पंडवानी से बस्तर की जनजातीय परंपराओं तक को मिले वैश्विक मंच
राज्यपाल ने छत्तीसगढ़ की लोककलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पंडवानी, पंथी, राउत नाचा, सुवा नृत्य, कर्मा और बस्तर की जनजातीय नृत्य परंपराएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं। इन कलाओं को डिजिटल माध्यमों पर प्रस्तुत करने से नई पीढ़ी इनके महत्व को समझ सकेगी और देश-दुनिया के दर्शकों तक भी इनकी पहुंच बढ़ेगी।उन्होंने विश्वविद्यालय की सात दशक लंबी यात्रा को विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। समारोह में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और कला शिक्षा के क्षेत्र में उसके योगदान को भी रेखांकित किया गया।
कला में सफलता के लिए अभ्यास, धैर्य और समर्पण जरूरी
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि संगीत मन को शांति देने का माध्यम है, जबकि नृत्य, चित्रकला और शिल्प किसी समाज के इतिहास, जीवनशैली और सांस्कृतिक मूल्यों को सामने लाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। इसके साथ नियमित अभ्यास, धैर्य और समर्पण भी जरूरी है।उन्होंने कला को रोजगार और व्यवसाय से जोड़ने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, कलाकार अपनी रचनात्मक क्षमता के माध्यम से आजीविका के नए अवसर तैयार कर सकते हैं। इसके लिए पारंपरिक कलाओं को आधुनिक माध्यमों और बाजार की जरूरतों के साथ जोड़ना उपयोगी हो सकता है।
राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती के योगदान को किया याद
समारोह में राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े राजपरिवार के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने दानवीर राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह और रानी पद्मावती को याद किया, जिन्होंने अपनी पुत्री राजकुमारी इंदिरा सिंह की स्मृति में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए योगदान दिया था।इस अवसर पर सांसद संतोष पांडे ने भी राजपरिवार के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपनी पुत्री की स्मृति में दिया गया यह दान दूरदर्शी सोच का उदाहरण है। उनके मुताबिक, इस पहल ने खैरागढ़ को कला और संगीत के क्षेत्र में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सांसद ने शिक्षा, कला-कौशल, मेहनत और राष्ट्रीयता की भावना को मजबूत बनाने का संदेश भी दिया।
कुलपति ने किया स्वागत, कई जनप्रतिनिधि और विद्यार्थी रहे मौजूद
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. लवली शर्मा के स्वागत उद्बोधन से हुई। समारोह में राजपरिवार की सदस्य राजकुमारी शताक्षी सिंह, सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह, प्रभारी कुलसचिव आर. वेंकट रमण गुड़े, जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, प्राध्यापक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।विश्वविद्यालय के 70वें स्थापना दिवस पर कला शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और पारंपरिक कलाओं को आधुनिक माध्यमों से आगे बढ़ाने की आवश्यकता प्रमुख विषयों के रूप में सामने आई।