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सरायपाली से रायपुर के 3 घंटे के सफर में अकड़ रहे हाथ-पैर; बसों की सीटें छोटी, पैर पसारने की भी जगह नहीं, क्या नियमों को ताक पर रखकर बढ़ाई जा रही हैं सीटें?

सरायपाली से रायपुर तक चलने वाली यात्री बसों में सफ़र करने वाले यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. महासमुंद जिले में परिवहन विभाग की नाकामी के चलते यात्रियों के ऐसे हालत बने हुए हैं. वैसे तो इस क्षेत्र के नेताओं की पहुँच अब दिल्ली तक हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी क्षेत्र की जनता बुनियादी सुविधाओं को तरसती दिखाई देती है.

क्षेत्र में रेल की सुविधा अब तक नहीं हो पाने से रोजाना हजारों की संख्या में लोग सरायपाली से रायपुर जाने के लिए निजी यात्री बसों का उपयोग किया करते हैं. लेकिन क्षेत्र में चलने वाली अधिकतर बसों में यात्रियों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है. इन बसों में यात्रियों को जानवरों की तरह ठुसकर परिवहन कराया जाता है.

ऐसे में सवाल यह है कि जिस देश में पशुओं के परिवहन के लिए नियम बनायें गए हो क्या वहां मानव के परिवहन के लिए शासन ने नियम नहीं बनाये हैं ? या फिर नियम तो बना दिए हैं लेकिन वह सिर्फ कागजों तक सीमित है. परिवहन विभाग के अधिकारी उसे पालन कराने में असमर्थ है.

कहीं ऐसा तो नहीं यात्री बसों के लिए शासन ने यात्रियों के बैठने हेतु जो नियम बनाये है वह यात्रियों के लिए पर्याप्त नहीं. इसलिए तो इन तीन घंटो के सफ़र में यात्रियों के हाथ-पैर, पीठ, कमर सब अकड़ने लगी हैं. अगर ऐसा है तो शासन को नियम में बदलाव करने की जरुरत है ताकि यात्रियों की परिवहन करने में परेशानी ना हो.

हमें शासन द्वारा निर्धारित नियमों की जानकारी नहीं है, ऐसे में परिवहन विभाग का यह काम होता है कि सरायपाली से रायपुर तक चलने वाली बसों की जाँच करें कहीं ये बस ऑपरेटरों ने नियमों का उलंघन कर सीटों को मोडिफाई तो नहीं कर दिया है. बस के सीटों की लम्बाई, चौड़ाई और गहराई की सही जाँच होनी चाहिए. कई बस ऑपरेटरों ने आपातकालीन खिड़की पर भी सीटें बनाकर रखी है. बैठते समय यात्रियों को पैर के लिए कितना गैप दिया जाना चाहिए इसकी भी जाँच करनी चाहिए.

कई बसों में सीट की व्यवस्था 3*2 कर दी गई है. अगर ऐसी बसें कभी दुर्घटना ग्रस्त हुई हो, इन सीटों में फंसकर ही यात्रियों का बुरा हाल हो जायेगा. लेकिन इन सब समस्याओं को नजर अंदाज किया जा रहा है, यहाँ लोगों की परेशानियों को नजर अंदाज कर बस ऑपरेटरों को फायदा पहुंचाया जा रहा है. जो कि मानवता के लिए अत्यंत ही दुर्भाग्य है.    

इसके साथ ही यात्रियों को नॉन स्टॉप के नाम पर धोखेबाजी कर कम समय में गंतव्य की दुरी तय करना बताकर बसना से रायपुर जाने के लिए अब 3 घंटे से भी अधिक का समय लगाया जाता है.

ये बसें बेलगाम रफ्तार के साथ बिना सुरक्षा के नेशनल हाइवे क्रमांक 53 पर दौड़ती है, जहाँ बिना स्टॉप के जगह-जगह बस को रोककर यात्रियों को बैठाया जाता है. नॉन स्टॉप के नाम पर ये बसें हर जगह यात्री उठाकर बसों में बैठाती है जिससे रायपुर की दुरी अब बसना से बढ़कर 2:30 से 3 घंटे से अधिक की हो चुकी है.

बहरहाल ये क्षेत्र के लोगों के परेशानियाँ हैं, इसपर कारवाई करना या ना, ना करना शासन-प्रशासन के हाथ में है, क्षेत्र के लोग अपना बहुमूल्य वोट देकर जनप्रतिनिधियों को चुनते हैं, तो जनप्रतिनिधियों को भी क्षेत्र के लोगों की समस्या समझनी चाहिए.


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