राजनीति के विभिन्न आयामों को नए सिरे से समझाती डॉ. अतुल मलिकराम की नई पुस्तक 'दिल सियासत'
इंदौर, 22/9/26। राजनीतिक रणनीतिकार, लेखक एवं समाजसेवी डॉ. अतुल मलिकराम की नई पुस्तक 'दिल सियासत' पाठकों के बीच दस्तक दे चुकी है। राजनीति और लोकतंत्र को केंद्र में रखकर लिखी गई यह पुस्तक आजादी के बाद भारतीय राजनीति के बदलते स्वरूप, राजनीतिक विचारधाराओं, दलों के उत्थान-पतन, नेतृत्व, सामाजिक समीकरणों और भविष्य की राजनीतिक दिशा जैसे विषयों को समेटती है।
दिल सियासत में 1977 से 2026 तक भारतीय राजनीतिक विचारधारा में आए बदलाव से लेकर लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक जिम्मेदारियों, विकसित भारत 2047, जलवायु परिवर्तन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता, भाजपा के उदय, मंडल-कमंडल की राजनीति, कांग्रेस के बदलते स्वरूप और भारतीय राजनीति में मुस्लिम नेतृत्व जैसे विविध विषयों पर लेख शामिल हैं। पुस्तक में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बुंदेलखंड की राजनीति के साथ-साथ युवा, महिला नेतृत्व, घुमंतू समाज और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को भी स्थान दिया गया है।
अपनी नई पुस्तक पर बात करते हुए डॉ अतुल मलिकराम ने कहा कि, "राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, आकांक्षाओं और बदलाव की दिशा को समझने का सबसे महत्वपूर्ण आईना है। दिल सियासत के माध्यम से मैंने भारतीय राजनीति को केवल घटनाओं के क्रम के रूप में नहीं, बल्कि विचारधाराओं, सामाजिक सरोकारों, नेतृत्व और लोकतांत्रिक बदलावों की यात्रा के रूप में समझने और सामने रखने का प्रयास किया है। मेरा विश्वास है कि राजनीति को समझना, दरअसल अपने समाज और लोकतंत्र को बेहतर ढंग से समझना है।"
डॉ. मलिकराम की लेखकीय यात्रा में राजनीति कोई नया विषय नहीं है। उनकी पूर्व प्रकाशित पुस्तकों दिल से, गल्लां दिल दी, दिल विल, दिल दश्त, कसक दिल की और दिल मेरा में भी राजनीति के साथ समाज, संस्कृति, शिक्षा, व्यवसाय और समसामयिक मुद्दों पर उनके विचार सामने आए हैं। विशेष रूप से दिल विल में तीसरे दल की भूमिका, एससी-एसटी राजनीतिक समीकरण, चुनावी खर्च और छोटे राज्यों जैसे विषयों पर चर्चा की गई थी, जबकि कसक दिल की में राजनीतिक उठा-पटक और समकालीन राजनीतिक चरित्र जैसे विषय शामिल रहे हैं।
दिल सियासत इसी लेखकीय यात्रा को अधिक व्यापक राजनीतिक फलक पर आगे बढ़ाती दिखाई देती है। पुस्तक में अतीत के राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ वर्तमान राजनीति और आने वाले भारत की संभावित चुनौतियों पर भी विचार किया गया है। इस लिहाज से यह पुस्तक भारतीय राजनीति को अलग-अलग दौर और मुद्दों के संदर्भ में समझने का प्रयास करती है।