CG : राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच कांग्रेस की तैयारी शून्य, क्या मिलेगा फायदा ? या पार्टी का विस्तार जरुरी
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2028 में अगला विधानसभा चुनाव होने को है, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कांग्रेस की तैयारी शून्य नजर आ रही है, हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के विधानसभा क्षेत्रों की, जहाँ एक तरफ भाजपा के कार्यकर्ता किसी तरह के कार्यक्रम कर हमेशा सोशल मीडिया में बने रहते हैं, तो वहीँ कांग्रेस अब भी इन सब से दूर नजर आ रही है.
बीते कुछ महीनों में राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की जो लोकप्रियता बढ़ी है, उसका लाभ आने वाले समय में पार्टी को मिल सकता है, लेकिन इसके लिए जरुरी है कि पार्टी के कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर जाकर लोगों से मुलाकात करे और उनकी समस्या सुने. इसके साथ ही पार्टी को विस्तार की भी जरुरत है, जिसमे अब पार्टी को युवाओं को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए. नहीं तो हमेशा की तरह कांग्रेस पार्टी को फिर से हार का सामना करना पड़ेगा.
हाल की में राहुल गांधी युवाओं के बीच अधिक लोकप्रिय हो रहे हैं, विपक्ष की भूमिका में इस बार जिस तरह उन्होंने सरकार को घेरा है, उससे सरकार की भी कई बार चिंता बढ़ी है, लेकिन छात्रों के मुद्दों को बार-बार सामने रखने के बाद भी कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई दिल्ली विश्वविद्यालय का चुनाव हार जाती है.
इसका मतलब बीजेपी चुनावी गणित समझने में माहिर है, जबकि कांग्रेस शून्य. छत्तीसगढ़ में बीते विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी चुनावी मैदान में उतरी तो उन्हें एहसास था कि स्थानीय नेताओं के दम पर उन्हें इस बार जीत नहीं मिलने वाली है, इसलिए बीजेपी ने मोदी की गारंटी की नाम का प्रचार किया, लोगों ने मोदी की गारंटी को स्वीकार किया और पूर्ण बहुमत से छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार आ गई, हालाकि आने वाले समय में बीजेपी छत्तीसगढ़ में मोदी की गारंटी चलेगी या नहीं यह एक प्रश्न का विषय है. क्योकि लोगों को यह समझ आने लगा है कि दिल्ली में बैठे नेता की गारंटी लेने से अच्छा है स्थानीय नेताओं की गारंटी पर भरोसा करें.
लेकिन इस बात को नाकारा नहीं जा सकता है कि अंतिम के क्षणों में भी भाजपा माहौल बदलने की क्षमता रखती है, आज जहाँ बीजेपी के पास बूथ लेवल के कार्यकर्ता है, यहाँ तक कि बीजेपी बूथ लेवल पर पन्ना प्रभारी कार्यकर्ता भी नियुक्त करती है, जिनकी समय-समय पर समीक्षा बैठक होती है. ये पन्ना प्रभारीयों की जिम्मेदारी मतदान केंद्र में केवल अपने ही पन्ने में दिए गए मतदाताओं को पोलिग बूथ पर लाने के लिए होता है. कई कार्यकर्ता ऐसे भी होते हैं जिन्हें जिम्मेदारी मिलती है तो खुद के पैसे पार्टी में लगाकर काम करने के लिए जुट जाते हैं.
लेकिन कांग्रेस की सबसे बड़ी कमजोरी आज भी यही है कि इनकी पार्टी को कार्यकर्ताओं का टोटा रहता है, ढूंढने पर भी कार्यकर्ता नहीं मिलते, आखिर ऐसा क्यों है क्या कांग्रेस में पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलता ? आज भी देखा जा रहा है कि शीर्ष के नेता आपसी मनमुटाव को लेकर खुद एक दुसरे की टांग खीचने में लगे रहते हैं. पार्टी के विस्तार और बूथ लेवल तक कार्यकर्ताओं को कैसे जोड़ा जाए इस पर ध्यान ही नहीं दिया जाता है.
छत्तीसगढ़ में विपक्ष का काम कांग्रेस नहीं बल्कि सोशल मीडिया में लोग कर रहे हैं, चाहे वह प्रधानमंत्री के जन्मदिन में बचे हुए तेल को बोतल में इकठ्ठा कर घर ले जाने की बात हो या फिर कोई अन्य मुद्दा, कांग्रेस स्थानीय स्तर पर मुद्दे उठाने में पूरी तरह से नाकाम रही है.
भले ही राहुल गांधी के छात्रों की गूंज की कार्यक्रम को बहोत फेम मिल रहा हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के बसना, सरायपाली जैसे क्षेत्रों में उसकी गूंज नहीं सुनाई देती है.