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राजनांदगांव में ट्रेड यूनियनों का धरना प्रदर्शन, चार श्रम कानून वापस लेने समेत कई मांगों को लेकर नारेबाजी

राजनांदगांव : श्रम कानून, किसान, आंगनबाड़ी, रसोईया, शिक्षा, रोजगार, महंगाई और वेतन वृद्धि समेत विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने सोमवार को राजनांदगांव कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया। देशव्यापी आंदोलन के तहत आयोजित प्रदर्शन में एटक, इंटक, सीटू, एक्टू और संयुक्त किसान मोर्चा समेत विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।

प्रदर्शन के दौरान ट्रेड यूनियनों ने चार श्रम कोड वापस लेने, महंगाई पर रोक लगाने, मजदूरों के वेतन में वृद्धि करने और किसानों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग की। इसके अलावा शासकीय विभागों में रिक्त पदों पर जल्द भर्ती शुरू करने और असंगठित मजदूरों के लिए अखिल भारतीय वेतन निर्धारण बोर्ड बनाने की मांग भी उठाई गई।

धरना प्रदर्शन के बाद ट्रेड यूनियन के संयुक्त मंच की ओर से अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भीमराव बागड़े ने कहा कि पहले लागू 44 श्रम कानूनों को खत्म कर चार श्रम कोड बनाए गए हैं, जिन्हें उन्होंने मजदूर हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि नए श्रम कानूनों से कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा मिल रहा है। साथ ही विभिन्न संस्थानों के निजीकरण और बढ़ती महंगाई का विरोध करते हुए मजदूरों के न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की मांग की।

वहीं प्रदर्शन में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपनी मांगें प्रमुखता से उठाईं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें अब तक शासकीय कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है और वेतन के स्थान पर मानदेय दिया जा रहा है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप ग्रेच्युटी का लाभ देने की मांग भी की।

ट्रेड यूनियन ने मजदूरों के लिए 42 हजार रुपये, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 41 हजार रुपये, सहायिकाओं के लिए 35 हजार रुपये और रसोईया कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग रखी। प्रदर्शन के दौरान विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।



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