बसना : एक महिला स्वास्थ्य कर्मी के भरोसे आयुष्मान आरोग्य मंद... - CG Sandesh

बसना : एक महिला स्वास्थ्य कर्मी के भरोसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर, असामाजिक तत्वों के बने रहने से असुरक्षित माहौल.

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इलाज की नि:शुल्क सुविधा देने हेतु केन्द्र सरकार ने पहले हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले थे, जिसका नाम बाद में बदलकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर कर दिया गया. वर्त्तमान में कई गाँव में उपस्वास्थ्य केन्र्द की जगह ये आयुष्मान आरोग्य मंदिर ले रहे हैं, जहाँ पहुँचने वाले ग्रामीणों को नि:शुल्क में बी.पी., शुगर, सर्दी, जुकाम, ख़ासी जैसे कई बिमारियों का इलाज किया जाता है.

इसके अलावा यहाँ महिलाओं के लिए जचकी की सुविधा के साथ नवजात शिशु की देखभाल, परिवार नियोजन की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. केंद्र सरकार की यह योजना जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में वरदान साबित हो रही है तो कुछ गाँव ऐसे भी हैं जहाँ सुविधा होने के बावजूद कर्मचारियों की अनुपस्थिति आभाव में यह योजना दम तोड़ती नजर आ रही है.

मामला बसना विकासखंड के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, उपस्वास्थ्य केन्द्र भंवरचुवा मधुबन का है, जहां इस आरोग्य मंदिर को संचालित करने की पूरी जिम्मेदारी केवल एक महिला आरएचओ के रूप में राधिका जगत पर है. जबकि इस आरोग्य मंदिर में एक सीएचओ की भी नियुक्ति की गई थी लेकिन उक्त सीएचओ ने नियुक्ति बाद कभी भी यहाँ अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई. आज भी इस आयुष्मान आरोग्य मंदिर में उक्त सीएचओ भरत ध्रुव की पोस्टिंग है, जिसके चलते किसी और की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है. भरत ध्रुव पोस्टिंग दिए जाने के बावजूद कभी यहाँ नहीं आये और ना ही उनपर किसी तरह की कोई विभागीय कार्यवाही हुई. जिसके चलते यहाँ कागजों पर सीएचओ के रूप में भरत ध्रुव की नियुक्ति तो है परन्तु जानकारी के अनुसार भरत ध्रुव मधुबन की बजाय महासमुंद में कार्य कर रहे हैं.

भरत ध्रुव के मधुबन में पोस्टिंग नहीं छोड़ने पर किसी और की नियुक्ति नहीं की जा सकती है, वहीँ स्वास्थ्य विभाग के कार्यवाही नहीं करने पर एक अकेली आरएचओ राधिका जगत को आरोग्य मंदिर में अत्यंत ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्षेत्र में आरएचओ द्वारा साप्ताहिक भ्रमण भी किया जाता है, जिसमे आरएचओ टीकाकरण सहित कई कार्य गाँव में घूमकर करती है. अब अकेली आरएचचो के होने से यह आयुष्मान आरोग्य मंदिर किस तरह संचालित हो रहा होगा इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं. आरएचओ के साप्ताहिक भ्रमण के साथ सेंटर में हमेशा बने रहना भी एक चुनौती जैसा है.

आरएचओ राधिका जगत की समस्या केवल यहाँ समाप्त नहीं हो जाती है. पानी की समस्या के आलावा आरएचओ राधिका जगत जिस आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पदस्थ है, वहां हमेशा असामाजिक तत्वों के बने रहने से राधिका जगत खुद को असुरक्षित महसूस करती है. आयुष्मान आरोग्य मंदिर के बाहर चारों तरफ असामाजिक तत्वों ने अपना डेरा बना लिया है, इन तत्वों द्वारा दिनभर देर रात तक गांजा, शराब का सेवन कर पार्टी शोर शराबा किया जाता है. इन असामाजिक तत्वों को नशे के सेवन के लिए शासकीय भवन भी मिले हुए हैं, शासन द्वारा पूर्व में बनाये गए आंगनबाड़ी, और वर्त्तमान में आधुनिक तौर पर बने सामुदायिक शौचालय जिसका उपयोग ना के बराबर होता है वहां ये असामाजिक तत्व अपना डेरा डालकर नशा पार्टी करते हैं. उन्हें कोई रोकने टोकने वाला नहीं होता.

बहरहाल इतनी परेशानियों के बीच एक अकेली आरएचओ राधिका जगत वहां अपनी स्वास्थ्य सेवाएं बिना किसी शिकायत के दे रही है.

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