ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का निधन - CG Sandesh

ज्योतिरादित्य सिंधिया की मां माधवी राजे सिंधिया का निधन

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की माता जी के निधन की खबर आई है. जानकारी के मुताबिक दिल्ली AIIMS में राजा माता माधवी राजे सिंधिया का निधन हो गया. नई दिल्ली AIIMS अस्पताल में अंतिम सांस ली. सम्भवतः कल ग्वालियर में होगा अंतिम संस्कार होगा.

माधवी राजे के लंग्स में था इंफेक्शन –
बता दें, माधवी राजे सिंधिया की तबीयत कुछ समय पहले से ज्यादा खराब थी। माधवी राजे सिंधिया के लंग्स में इंफेक्शन था। उनका इलाज एम्स दिल्ली में चल रहा था। गंभीर हालत होने पर उन्हें एम्स के आईसीयू में भर्ती कराया गया था और उन्हें वेंटिलेटर का सपोर्ट दिया गया था। कुछ दिन पहले ही उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ने की बात सामने आई थी और बताया गया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी प्रियदर्शनीराजे सिंधिया उनकी देखभाल के लिए दिल्ली में ही हैं।


एम्स में चल रहा था इलाज-
गुना-शिवपुरी संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ( jyotiraditya scindia ) की मां माधवी राजे सिंधिया की 3 महीने से पहली बार 15 फरवरी को तबीयत बिगड़ी थी। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसके बाद से ही उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। वे लाइफ सपोर्ट सिस्टम ( वेंटिलेटर ) पर थीं। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कुछ समय पहले यह जानकारी शेयर की थी।

नेपाल राजघराने से थीं माधवी राजे –
नेपाल राजघराने से माधवी राजे सिंधिया ( Madhvi Raje Scindia ) का संबंध था। उनके दादा शमशेर जंग बहादुर राणा नेपाल के प्रधानमंत्री थे। कांग्रेस के दिग्गज नेता माधवराव सिंधिया के साथ विवाह से पहले प्रिंसेस किरण राज्यलक्ष्मी देवी उनका नाम था। साल 1966 में माधवराव सिंधिया के साथ उनका विवाह हुआ था। मराठी परंपरा के मुताबिक शादी के बाद उनका नाम बदलकर माधवी राजे सिंधिया रखा गया था। पहले वे महारानी थीं, लेकिन 30 सितंबर 2001 को उनके पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री माधवराव सिंधिया के निधन के बाद से उन्हें राजमाता के नाम से संबोधित किया जाने लगा।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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