सरायपाली : भाषा-उत्सव कार्यक्रम का किया गया आयोजन - CG Sandesh

सरायपाली : भाषा-उत्सव कार्यक्रम का किया गया आयोजन

सरायपाली : भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश के परिपालन के साथ बीईओ प्रकाशचंद्र मांझी, बीआरसीसी सतीश स्वरूप पटेल के मार्गदर्शन विकासखण्ड सरायपाली के विभिन्न विद्यालयों में भाषा-उत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इसी तारतम्य में संकुल प्रभारी दामोदर महापात्र, संकुल समन्वयक अरुण विशाल के मार्गदर्शन तथा प्रधान पाठक धर्मेन्द्रनाथ राणा के नेतृत्व में शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिरबोडा में भाषा महोत्सव कार्यक्रम मनाया गया। प्रधान पाठक राणा ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है, यहां पर विभिन्न जाति, धर्म एवं संप्रदाय के लोग रहते हैं। भारत में विविधता में एकता है। यहां पर विभिन्न प्रकार की भाषाएं जैसे - ओड़िया, हिंदी, बांग्ला, गुजराती, मराठी, पंजाबी, तेलुगू, कन्नड़ आदि भाषाएँ बोली जाती हैं। भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए तथा उनके विकास के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से भाषा-उत्सव मनाया जा रहा है। अंतिम दिवस 11 दिसम्बर को राष्ट्रवादी महान तमिल कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रमण्यम भारती के जयंती को भाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। सुब्रमण्यम भारती बहुत से भाषाओं के जानकार थे। वह एक तमिल कवि थे, उन्होंने आजादी के आंदोलन में लोगों को जागृत करने के लिए बहुत से देशभक्ति गीतों की रचना की थी।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक महेश कुमार साहू ने भी विद्यार्थियों को मातृभाषा के अलावा अन्य भाषाओं को भी महत्व देने हेतु प्रोत्साहित किया।
विद्यालय में ड्राइंग-पेंटिंग तथा विभिन्न राज्यों के पोशाक पहनकर विद्यार्थियों ने विभिन्न भाषाओं में अभिवादन से संबंधित संवाद किए। विद्यार्थी बहुत ही उत्साही नजर आए एवं कार्यक्रम में सभी कक्षा के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतिभागी विद्यार्थियों को पुरस्कार स्वरूप कापी और पेन वितरित किया गया।
 
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय - केना (सरायपाली) में अंग्रेजी के व्याख्याता शैलेन्द्र कुमार नायक के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने देशभक्ति पूर्ण ओड़िया गीत - 'एई देशो एई माटी' को सस्वर प्रस्तुत किया। शैलेन्द्र नायक ने निकटवर्ती राज्य ओड़िशा की मधुर भाषा के गीत का अभिप्राय और संदेश को बताया। हिंदी के व्याख्याता रुद्रसिंह राय ने कहा कि अपनी मातृभाषा के सम्मान के साथ-साथ अन्य भाषाओं के प्रति भी सहृदयता एवं सम्मान जरूरी है। प्राचार्य मोहित लाल नायक ने बच्चों को मधुर वाणी और विनम्र व्यवहार के साथ एक-दूसरे के भाषा के प्रति सम्मान रखने के लिए प्रेरित किया। नयी भाषा को सीखने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। संस्था के शंभु कुशवाहा एवं सत्यप्रकाश साहू ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। सभी विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण रखने के लिए तथा बहुभाषी समाज की स्थापना के लिए यह कार्यक्रम बहुत ही उपयोगी है।

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