स्थान्तरण के बावजूद डॉक्टर को शासकीय आवास में निवास करना पड़ा महंगा, 11लाख किराया व आवास खाली करने जारी हुआ नोटिस
सरकारी व्यवस्था में सबकुछ चलता है. तमाम महकमों की तरह स्वास्थ्य विभाग में भी अव्यवस्था हावी है. सरायपाली में डॉ. व्ही के कोशरिया ने तबादले के बावजूद सरकारी आवास खाली नहीं किया है. जबकि संबंधित अधिकारियों को नोटिस भी हुए विभाग को दिया है, लेकिन उन्होंने इन आदेशों को हवा में उड़ा दिया. जबकि आदेश जारी हुए लगभग 2 माह हो गए है.
दरअसल डॉ व्ही. के. कोशरिया का स्थानांतरण दो माह पूर्व ही सरायपाली से महासमुंद के किसी अन्य जिले में हो चूका है, लेकिन शासकीय आवास का मोह के चलते नियमों को ताक में रखकर अब भी वहां अपना निवास बनाये हुई है. जबकि नियमानुसार स्थानांतरण के पश्चात् सक्षम अधिकारी की अनुमति से शासकीय आवास में रहने की समय सीमा मात्र 2 माह है.
अब डॉ. कोशरिया को मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आदेश भेज इस बात का अवगत कराया है कि आप बड़े लम्बे समय से अनाधिकृत रूप से सरायपाली के पुराने अस्पताल परिसर को अपने अधिपत्य में रखा हुआ है. जिसे जल्द से जल्द रिक्त कर अधिकारी को सूचित करें. इसके साथ आदेश में यह भी कहा गया है कि, छत्तीसगढ़ आवास अम्बाटन के अनुशार अनधिकृत रूप से रह रहे आवास पे बाजार दर से दुगुनी की राशि से शुल्क लेना है. जो कि ग्यारह लाख चौबीस हजार सात सौ रुपये हो रहा है.
आवास अभी तक ख़ाली नहीं कराया गया है, इस संबंध में जो भी फैसला होगा वह मुख्य स्वास्थ चिकित्सा अधिकारी ही ले सकते है
-- डॉ. अमृत, बीएमओ, सरायपाली.
यदि आवास अब तक खाली नहीं हो पाया है तो इस बात तो जरुर संज्ञान में लिया जाएगा.
-- डॉ. मंगरुलकर, मुख्य स्वास्थ एवं चिकित्सा अधिकारी, जिला महासमुंद.