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कृषि उपज बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए अच्छी खबर, आइये जानें

भाटापारा– समर्थन मूल्य पर कृषि उपज बेचने की तैयारी कर रहे किसानों के लिए अच्छी खबर। इस बरस जूट के बारदाने 1200 से 1500 रुपए प्रति सैकड़ा की दर पर खरीदे जा सकेंगे।

प्रदेश में पखवाड़े भर बाद एक नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू हो रही है। प्रशासनिक तैयारियां, जहां पूरी हो चुकी हैं, तो जूट बारदाना का थोक बाजार भी अपने स्तर पर न केवल तैयार है बल्कि सीमावर्ती जिलों में भंडारण भी करने लगा है।


 इसलिए राहत

उत्तर प्रदेश के आलू- प्याज उत्पादक जिले। किसानों और बड़े कारोबारियों की खरीदी, छत्तीसगढ़ के जूट बारदाने में फिलहाल बंद है। यह इसलिए क्योंकि लगातार बारिश ने तैयार फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसका असर छत्तीसगढ़ के बारदाना बाजार पर भी पड़ा है। परिणाम, बीते साल की तुलना में इस बार सैकड़ा पीछे 200 रुपए टूट के रूप में देखा जा रहा है।

 प्रतीक्षा स्थानीय मांग की

बड़ा सहारा थी, इस प्रदेश की मांग लेकिन जैसी प्रतिकूल स्थितियां बनी हुई है उसे देखते हुए जूट बारदाना का बाजार अब स्थानीय मांग निकलने की प्रतीक्षा में है। यह इसलिए क्योंकि एक नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू होने वाली है। इसलिए भरपूर भंडारण को देखते हुए यह क्षेत्र, किसानों की डिमांड की राह देख रहा है, जो हर बरस अच्छी-खासी संख्या में बारदाना की खरीदी करते हैं।

इस साल, इस दर पर

बरस-दर- बरस पुराने बारदानों की खरीदी को लेकर किसानों में जैसा रुझान बढ़ा है, उसके बाद यह क्षेत्र भी प्रतिस्पर्धा के दौर से गुजर रहा है। इसलिए कीमत कम करके, ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि सैकड़ा पीछे 200 रुपए की टूट आ चुकी है। दो बार उपयोग में लाए जा चुके बारदाने, इस बार 1200 से 1500 रुपए सैकड़ा में लिए जा सकेंगे। इसमें और टूट के संकेत मिल रहे हैं।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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