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सरायपाली : सेवा पखवाड़ा आयुष्मान भव अभियान 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक

सरायपाली : भारत के राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के द्वारा 13 सितंबर को आयुष्मान भव अभियान का शुभारंभ राष्ट्रीय स्तर पर किया गया इसमें वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से स्वर्गीय मोहनलाल चौधरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली के समस्त स्टाफ वर्चुअल रूप से जुड़े हुए थे जिसमें बीएमओ डॉक्टर एच एल जांगड़े के द्वारा तीन हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किया गया था।

अब आयुष्मान भव अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर से आयुष्मान आपके द्वारा 3.0 के तहत सभी पात्र हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड का वितरण व आयुष्मान मेला का आयोजन सभी हेल्थ वेलनेस सेंटर व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर किया जाएगा तथा रक्तदान शिविरों का आयोजन स्वैच्छिक रक्तदान से जुड़ी जानकारी प्रदान की जाएगी साथ ही लोगों को स्वैच्छिक अंगदान के लिए जानकारी देने के लिए प्रतिज्ञा कराया जाएगा इसी कड़ी में स्वर्गीय मोहनलाल चौधरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरायपाली के सभी स्टॉफ व आम नागरिकों को अंगदान हेतु प्रेरित करने का प्रतिज्ञा दिलाया गया जिसमें बीएमओ डॉ एच एल जांगड़े के द्वारा बताया गया कि कोई भी व्यक्ति स्वेच्छा से देह दान या अंग दान कर सकता है प्रायः किडनी, हार्ट ,लीवर, फेफड़ा, पेनक्रियाज, कॉर्निया और छोटीआंत का दान किया जाता है तथा उत्तकों में हृदय के वाल्व, हड्डियां और त्वचा का दान किया जा सकता है अन्य तरह के अंगदान के लिए सम्बन्धित व्यक्ति को डॉक्टर द्वारा ब्रैन डेड घोषित किया जाना आवश्यक होता है। 

देश में अंगदान के लिए ट्रास्पलेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन एक्ट। ( होटा) 1994 लागू है जिसका मुख्य उद्देश्य चिकित्सकीय प्रायोजनों के लिए मानव अंगों के निष्कासन, भंडारण और प्रत्यर्पण को विनियमित करना है साथ ही यह मानव अंगों के वाणिज्य प्रयोग को भी प्रतिबंधित करता है। आगे खंड विस्तार प्रशिक्षण अधिकारी टी आर धृतलहरे ने बताया की जिस तरह से हमारे रक्तदान करने के कुछ माह बाद हमारा शरीर उतना ही रक्त का पुनः निर्माण कर लेता है उसी प्रकार से यदि हम अपने शरीर की लिवर पेनक्रियाज जैसे अंगों का कुछ भाग दान करते हैं तो बचा हुआ पार्ट पूर्व की तरह विकसित हो जाता है । 

विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक शीतल सिंह ने लोगों को बताया कि आम नागरिकों में यह भ्रांति है कि यदि हम अपना अंगदान करते हैं तो अगले जन्म में हम अंधा, लूला, लंगड़ा पैदा हो जाएंगे जो की पूर्णतः गलत है , देहदान के संबंध में हमारे ग्रंथो में भी उल्लेख है जिसमें महर्षि दधीचि का नाम सबसे ऊपर आता है जिन्होंने वृतासुर नामक राक्षस के वध हेतु अपना देह त्याग कर दिया था एवं देवताओं ने उसके हड्डी से वज्र बनाकर वृतासुर राक्षस का वध किया था । स्वास्थ्य विभाग आम नागरिकों से अपील करता है कि निसंकोच होकर देहदान व अंगदान करें एवं अधिक से अधिक जानकारी हेतु नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर संपर्क करें।

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