सरायपाली : पेड़ों पर लग गए विज्ञापन लेकिन संस्था को नहीं है पता, कहा प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने उठाया गया होगा कदम.
सरायपाली और बसना क्षेत्र के कई पेड़ों में निजी संस्थान के विज्ञापन लग गए और इन संस्था के संचालकों को इनकी जानकारी तक नही. आज इंटरनेट पर यह लेख हमने प्रकाशित किया था कि पेड़ों पर निजी संस्था के विज्ञापन लगाये जा रहे हैं. जिन पेड़-पौधों को बचाए जाने की बात की जाती है उन्ही पेड़ों को हानि पहुंचाकर उसमे निजी संस्थानों द्वारा विज्ञापन लगाये जाते हैं.
गढ़फुलझर क्षेत्र के कई पेड़ों में हमने जयश्री कपड़ा दुकान और जय अम्बे ज्वेलर्स का विज्ञापन देखा जहाँ फ्लेक्स को खील ठोककर लगाया गया था, इस लेख के संबंध में संस्था के संचालक ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि “हम सदैव पर्यावरण प्रेमी रहे हैं । सरायपाली के विभिन्न सेवा भावी समाजसेवी संस्थाओं से जुड़ कर वृक्षारोपण का कार्य करते रहे हैं । हाल ही में मुक्तिधाम सरायपाली में वृक्षारोपण का कार्य में हमने सहभागिता दी थी। हमें इस बात की जानकारी बिल्कुल नहीं है कि पेड़ों पर हमारे संस्थान का विज्ञापन लगाया गया है।
हमारी संस्था की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने किसी व्यक्ति ने यहां कदम उठाया होगा । आप यदि किसी वृक्ष पर हमारी संस्था के विज्ञापन देखेंगे तो कृपया उसे उतार देंगे । आपके द्वारा अपने किसी पोर्टल के लिए विज्ञापन दर भेजा गया था क्योंकि हमारी संस्था सही वस्तु कम दाम पर विक्रय करती है जिस हेतु हमें हमारे खर्चों पर कटौती करने की चिंता सदैव रहती है इसलिए हमने आपको विज्ञापन नहीं दिया था। आपके द्वारा कोई खबर लगाने से हमें कोई आपत्ति नहीं हैं।”
उनका कहना है कि पेड़ों पर लगे हमारे संस्थान के विज्ञापन के बारें में हमें कोई जानकारी नहीं है, हम सदैव पर्यावरण प्रेमी रहे हैं. लेकिन आज हमने बसना से भंवरपुर मार्ग में भी कई पेड़ों पर इसी संस्था के अलावा और भी कई संस्थान के विज्ञापन देखने को मिले. इस बात की जब हमने पड़ताल कर एक अन्य संस्था श्री सिद्धी विनायक टाइल्स से संपर्क किया तो उनका कहना था कि उन्ही के लड़कों द्वारा यह विज्ञापन लगाया गया है.
वहीँ फ्लेक्स में लिखे प्रिंटिग प्रेस से संपर्क करने पर उन्होंने फ्लेक्स संस्थान संचालक द्वारा ही प्रिंट करवाए जाने की बात कही, अब संस्था की छवि धूमिल करने के लिए यह फ्लेक्स किसने छपवाए यह एक बड़ा सवाल है. लेकिन यह सोचने वाली बात है कि क्या एक पेड़ की कीमत स्थानीय पोर्टल में लगने वाले विज्ञापन की दर से कम है ? शायद इसलिए ही संस्था पेड़ों में विज्ञापन लगवाने के शौकीन हैं.