CG : एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत - CG Sandesh

CG : एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत

आरंग। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे आरंग में अमरूद तोड़ने के दौरान कुएं में गिरने से एक ही परिवार के तीन बच्चों की मौत हो गई है। मरने वाले बच्चों में दो सगे भाई-बहन और एक उनका चचेरा भाई शामिल हैं। हादसा रविवार को आरंग के चरौदा गांव में हुआ है। इस हादसे के बाद गांव में मातम पसर गया है। वहीं घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को जांच के लिए भेज दिया। मामला आरंग थाना क्षेत्र का है।

बताया जा रहा है कि मरने वालों में 8 वर्षीय केशर साहू, 5 वर्षीय उल्लास साहू है। ये दोनों गांव के ही रहने वाले सोमनाथ साहू के बेटा-बेटी थे। सोमनाथ के भाई जितेंद्र का बेटा 4 वर्षीय पेयस साहू भी इन्हीं के साथ खेल रहा था। कुएं में गिरने से बच्चों के चचेरे भाई पेयस की भी मौत हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार, कल सोमनाथ के भाई जितेंद्र का बेटा अपने भाई-बहन के साथ पेड़ पर चढ़ा। तीनों बच्चे अमरूद तोड़कर खाना चाहते थे। घर में ही अमरूद का पेड़ और सार्वजनिक कुआं है। पेड़ पर चढ़े बच्चों की वजह से टहनियां चरमरा गईं, संतुलन खोकर बच्चे कुएं में जा गिरे। काफी देर तक जब बच्चों की न कोई आवाज आई, न वो घर लौटे तो परिजनों को चिंता हुई। घर वाले बच्चों को आस पास ढूंढने में लग गए, तभी कुएं में लगी जाली टूटी नजर आई, ये बच्चों के गिरने से टूट गई थी। परिवार के लोगों ने झांक कर देखा तो तीनों मासूमों की लाशें दिखी। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है।

कुएं में डूबे बच्चों के शवों को पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से बाहर निकाला। छोटे बच्चों के शवों को देखकर साहू परिवार की औरतें रो पड़ीं। गांव के मर्द भी शवों को देखकर सिहर उठे। परिजन इस घटना की वजह से सदमे में हैं। घरवालों ने बताया कि बच्चे अक्सर साथ खेला करते थे। कुछ देर पहले ही घर के पास थे उनकी आवाजें आ रही थीं, अब हमारे आंगन में सन्नाटा है।


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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