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क्या राष्ट्रपति करेंगे नई संसद भवन का उद्घाटन? बवाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई

आज संसद का उद्घाटन राष्ट्रपति( president) से करवाने की याचिका पर SC में सुनवाई होगी। एडवोकेट जया सुकिन ने गुरुवार को यह याचिका लगाई थी।

राष्ट्रपति के पास संवैधानिक पदाधिकारियों को नियुक्त करने के अधिकार हैं। ऐसे में उन्हें नई संसद के इनॉगरेशन में न बुलाना राष्ट्रपति पद का अपमान है। इस मामले में लोकसभा सचिवालय, गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय को पार्टी बनाया गया है।

भाजपा समेत 25 पार्टियां शामिल होंगी: भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट), शिरोमणी अकाली दल, जनता दल (सेक्युलर), बसपा, NPP, NPF, NDPP, SKM, JJP, RLJP, RPI (अठावले), अपना दल (एस), तमिल मनीला कांग्रेस, ITFT (त्रिपुरा), बोडो पीपुल्स पार्टी, AIADMK, BJD, तेलुगू देशम पार्टी, YSR कांग्रेस, IMKMK, MGP, AGP, AJSU और MNF। समारोह में शामिल होने वाली 7 पार्टियां NDA का हिस्सा नहीं हैं।

मोदी 28 मई को नए संसद भवन के उद्घाटन के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास पवित्र सेंगोल (राजदंड) स्थापित करेंगे। अंग्रेजों की तरफ से 14 अगस्त 1947 की रात इसे पं. नेहरू को सत्ता हस्तांतरण के रूप में सौंपा गया था। 1960 से पहले यह आनंद भवन और फिर 1978 से इलाहाबाद म्यूजियम में रखा था। अब 75 साल बाद संसद में राजदंड आएगा।

20 पार्टियां विरोध कर रहीं: कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, DMK, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (उद्धव गुट), समाजवादी पार्टी, राजद, CPI, JMM, केरल कांग्रेस (मणि), VCK, रालोद, राकांपा, JDU, CPI (M), IUML, नेशनल कॉन्फ्रेंस, RSP, AIMIM और MDMK।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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