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मणिपुर हिंसा में फंसे एमपी के छात्र, सीएम शिवराज ने की मणिपुर के राज्यपाल से चर्चा,सिंधिया ने भी छात्रों से बातचीत

मणिपुर हिंसा में फंसे एमपी के छात्रों को निकालने की(MANIPUR VIOLENCE) कवायद तेज हो गई है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मणिपुर के राज्यपाल से फोन पर बात की है। जल्द ही (MANIPUR VIOLENCE)एमपी सरकार छात्रों को एयरलिफ्ट कर वापस लाएगी। वहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मणिपुर में फंसे छात्रों से फोन पर चर्चा की और जल्द सुरक्षित वापस लाने का भरोसा दिया है।

गौरतलब है कि बहुसंख्यक मेइती समुदाय को अनसूचित जनजाति का दर्जा देने के फैसले के खिलाफ आदिवासी समूह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ ने 3 मई को आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला था, लेकिन इस दौरान हिंसा हो गई। तनाव इतना बढ़ गया कि सेना को तुरंत तैनात किया गया। हिंसा के कारण एमपी के कई छात्र वह फंस गए हैं। प्रदेश के करीबन 30 छात्र मणिपुर की सेंट्रल यूनिवर्सिटी, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, ट्रिपल आईटी, NIT और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी में फंसे है।


विधायक ने लिखा था पत्र

रविवार को पंधाना विधायक राम दांगोरे ने परिजनों की तरफ से सीएम शिवराज को मदद के लिए पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा- इंफाल के एनएसयू विश्वविद्यालय में मध्य प्रदेश के लगभग 30 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें खंडवा के 3 विद्यार्थी शामिल हैं। मणिपुर राज्य में दंगे के हालात निर्मित होने के बाद स्थितियां अनियंत्रित हो गई हैं, जिसके कारण मेघालय, नागालैंड, मणिपुर सरकार ने अपने राज्य के छात्रों को निकालने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।खंडवा के जो विद्यार्थी हैं, उन्हें तुरंत एअरलिफ्ट कर उनका रेस्क्यू कर उन्हें वापस मध्यप्रदेश लाया जाए।



भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर

पीजी पोर्टल में शिकायत के बाद भी नहीं मिल रहा न्याय, जाँच प्रणाली में सुधार की आवश्यकता, आजादी के 79 साल बाद भी शिकायत के जाँच में स्वतंत्रता नही.


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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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