200 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके प्रख्यात अभिनेता का निधन - CG Sandesh

200 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके प्रख्यात अभिनेता का निधन

चेन्नई। तमिल सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता मयिलसामी का रविवार तड़के निधन हो गया। दक्षिण भारतीय कलाकार संघ (एसआईएए) ने इसकी एक ट्वीट में जानकारी दी। एसआईएए ने ट्वीट में लिखा कि  57 वर्षीय हास्य कलाकार मयिलसामी को रविवार तड़के दिल का दौरा पड़ा। वहीं फिल्म व्यापार विश्लेषक रमेश बाला ने कहा कि मायिलसामी को बेचैनी की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनका निधन हो गया।

मयिलसामी ने 200 से अधिक फिल्मों में काम किया था। उन्होंने कई तमिल फिल्मों में हास्य और चरित्र भूमिकाओं में अभिनय किया है। वह एक प्रशंसित मंच कलाकार, स्टैंड-अप कॉमेडियन, टीवी होस्ट और थिएटर कलाकार भी थे।मयिलसामी ने करियर की शुरुआत मशहूर कॉमेडी टीवी शो के मेजबान और जज के रूप में की। अभिनेता की पहली फिल्म ध्वनि कानवुगल थी जो साल 1984 में रिलीज हुई थी।


तमिल फिल्म उद्योग में अनुभवी फिल्म निर्माता-अभिनेता के भाग्यराज ने उन्हें मौका दिया था। इसके बाद कई छोटे-मोटे रोल किए। उन्होंने पहली बार कमल हासन के साथ अपूर्व सगोधरगल (1989) में और रजनीकांत के साथ पन्नक्करन (1990) में अभिनय किया।

मयिलसामी 2000 के बाद तमिल दर्शकों के बीच एक घरेलू नाम बन गए थे। उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में धूल, वसीगरा, घिल्ली, गिरी, उथमपुथिरन, वीरम और कंचना शामिल हैं। उन्होंने कंगालाल कैधु सेई (2004) में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार जीता।

एक फिल्म अभिनेता होने के अलावा, मयिलसामी एक प्रशंसित थिएटर कलाकार, मंच कलाकार, टीवी होस्ट और स्टैंड-अप कॉमेडियन भी थे। उन्होंने टेलीविजन में भी काम किया था। मयिलसामी ने सन टीवी पर प्रसारित होने वाले लोकप्रिय कॉमेडी शो असाथापोवथु यारू के होस्ट और जज बने।

उन्होंने सन टीवी सोप ओपेरा, मर्मदेशम में भी अभिनय किया था।साल 2022 में मायिलसामी को कई फिल्मों में देखा गया, जिनमें नेन्जुक्कु निधि, वीतला विशेषम, द लेजेंड और उड़नपाल शामिल हैं। उनके आकस्मिक निधन से तमिल फिल्म उद्योग के कई अभिनेताओं को झटका लगा है। अभिनेता के निधन पर उनके कई साथी कलाकारों ने शोक व्यक्त किया है।



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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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