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सरायपाली : नक्सली पर्चा मिलने की बातों पर ग्रामीणों ने कहा अफवाह, बताई अपनी समस्याएं

सरायपाली। बलौदा चौकी से 19 किलोमीटर की दूरी पर 13 जून 2018 को ग्राम पंचायत टेमरी के आश्रित ग्राम जामपाली के कई जगह पर नक्सली पर्चा बाँटने की बात सामने आई. जानकारी के अनुसार उक्त पर्चे में बलांगीर-बरगढ़-महासमुंद डिविजनल कमेटी, भाकपा (माओवादी) द्वारा पुरे भारत में किसान आन्दोलन के समर्थन को लेकर लिखा हुआ था.

बताया जा रहा था कि रविवार रात 8 बजे कुछ अज्ञात लोगों द्वारा जामपाली और टेमरी में पर्चे बांटे गए है. मामले की पड़ताल करने जब छत्तीसगढ़ संदेश की टीम जामपाली पहुंची तो संबंध में ग्रामीणों ने नक्सली पर्चा बांटे जाने की घटना से इन्कार किया और कहा कि कुछ शरारती तत्वों की भी करतूत हो सकती है. मीडिया को देखकर गाँव वालों ने यहाँ की अपनी प्रमुख समस्याएं बताई और कहा कि जल्द ही सरकार हमारी समस्याओं का समाधान करे.

18 वर्षों से नहीं हो पाया पट्टे का नवनीकरण, भटक रहे ग्रामीण

इस गाँव के लगभग दो दर्जन परिवार बीते 18 साल से जमीन पट्टा के लिए भटक रहे हैं. इन परिवारों का कहना है कि मध्यप्रदेश शासन में वर्षों पूर्व बांटे गए पट्टे का नवनीकरण प्रशासनिक लापरवाही के चलते नहीं हो पा रहा है जबकि इसके लिए उन्होंने पूर्व में कई बार इस बारें में अपनी शिकायत पटवारी, वनविभाग, तहसीलदार, कलेक्टर तथा मुख्यमंत्री से भी कर चुके है.

ग्रामीणों का कहना है कि जब ये तहसीलदार के पास जातें है उन्हें यह जमीन वन विभाग में है कहकर उन्हें वन विभाग में जाने कह देता है और वन विभाग कहता है कि यह जमीन उसके अंतर्गत नहीं आता.

जिसके कारण यहाँ के किसानों को ऋण, खाद, तथा खेतों में बिजली नहीं मिल पाती है. ग्रामीणों का कहना है कि छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर में बसे इस गाँव पर शासन का ध्यान जरा सा भी नहीं है. जिसके चलते उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

 

प्रधानमंत्री आवास में जरुरतमंद को प्राथमिकता नहीं

जामपाली में एक मोहल्ला ऐसा भी है जहाँ आज भी सिर्फ और सिर्फ मिट्टी और लकड़ी के घर दिखाई देते है. 1 वर्ष पूर्व यहाँ प्रधानमंत्री आवास के तहत घर बनना शुरु हुए है मगर यहाँ देखकर ऐसा लगता है कि जिनके घर बनने की प्राथमिकता पहले होनी चाहिए थी उन्हें अब भी इसके बनने का इंतज़ार करना पड़ रहा है.

कार्य को देखते हुए ग्रामीणों में उम्मीद है कि जल्द ही उन्हें भी आवास मिलेगा परन्तु जरुरतमंदों को प्राथमिकता ना देने की वजह से कुछ लोग मायुश भी है उनका कहना है कि इस वर्ष बरसात में फिर से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ेगा.

 

नल जल योजना लगाया गया पर लाभ नहीं

ग्रामीणों ने बताया कि उनके गाँव में नल लगाये गए है पानी के लिए टंकिया बनवायी गयी है यहाँ तक की पशुओं के पीने के लिए भी पानी टंकी बनवायी गयी है. मगर बोर के नहीं होने की वजह से नहीं चल पा रहा है. ग्रामीण यहाँ निजी बोर से ही अपने नहाने तथा पीने का पानी लाते है. पहाड़ी इलाके में होने की वजह से यदि बिजली चली जाती है तो पानी के लिए उन्हें काफी दूर तक भटकना पड़ता है.


नहीं बने पुरे शौचालय

जामपाली गाँव में अब भी हर घर में शौचालय का पूरा नहीं हुआ है बहोत से घरों में शौचालय का नामो निशान तक नहीं है अब भी ग्रामीण शौच के लिए बहार जातें है.

जर्जर हुआ मकान बीट गार्ड गायब

जंगली इलाके होने की वजह से यहाँ अवैध कटौती की निगरानी और ग्रामीणों की सुरक्षा एक बीट गार्ड पदस्थ किया गया था. ग्रामीणों ने बताया कि बीट गार्ड के मकान जर्जर हो जाने की वजह से वह यहाँ नहीं आता है और बलौदा में ही रहता है.


डर का माहौल नहीं

तीनों ओर से पहाड़ों में घिरे प्रकृति की गोद में ग्राम जामपाली स्थित है लोगों के आवागन में यहाँ किसी भी प्रकार के डर का मौहोल नहीं है. ग्राम जामपाली शिशुपाल पर्वत के पीछे स्थित है. यहाँ पहुचने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क के तहत मार्ग का निर्माण करवाया गया है जिसके चलते आवागमन में कोई असुविधा नहीं होती है.



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