श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैम्पस जुनवानी भिलाई द्वारा किया जा रहा सात दिवसीय योगाभ्यास 3.0 का आयोजन
राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई श्री शंकराचार्य टेक्निकल कैम्पस जुनवानी भिलाई द्वारा सात दिवसीय योगाभ्यास 3.0 का आयोजन "मानवता के लिए योग" के थीम के अंतर्गत ग्लोबल योग अलाइंस के सहयोगिता में 15 जून से 20 जून की अवधि में पूर्णतः आनलाइन माध्यम से किया जा रहा है ।
योगाभ्यास 3.0 के इस शिविर में विशिष्ट योग विशेषज्ञ योगशिरोमणि डाॅ. गोपाल जी, योगगुरू डाॅ. श्याम जी एवं विज्ञानन्द योगाश्रम संघ के खोजकर्ता डाॅ. हिरेन सरकार के द्वारा विभिन्न रोगों जैसे माइग्रेन, अस्थमा,तनाव एवं विभिन्न मानसिक रोग एवं डायबिटीज, के उपचार हेतु विशेष योगशिक्षा से प्रतिभागियों तथा स्वयंसेवकों को उचित मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।
योगाभ्यास के इस विशेष शिविर के दौरान विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न रोगों के उपचार हेतु कई योग एवं प्राणायाम बताए जा रहे हैं जैसे अनुलोम विलोम से दमा अथवा अस्थमा के मरीजों को भलीभांति रूप से श्वास लेने में आसानी होती है, साथ ही उन्होंने बताया कि योग को अपने दिनचर्या में ढालना अत्यंत ही आवश्यक है, योग करना यानी रोगों से मुक्त होना इस तथ्य की पुष्टि करते हुए उन्होंने यह भी बताया कि दवाओं से शारिरिक पीड़ा कुछ समय के लिए नष्ट तो हो जाती है लेकिन बाद में उसका परिणाम सही नहीं मिल पाता, जीवन में योग की आवश्यकता दवाओं से अधिक होनी चाहिए।
वर्तमान में 80 से अधिक प्रतिभागी इस शिविर में सम्मिलित होकर अनेक लाभदायक उपयों को अपने दिनचर्या में ढालने का प्रयास भी कर रहे हैं , स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न प्रश्नों को सामने रखकर विशेषज्ञों द्वारा समाधान एवं उचित मार्गदर्शन प्राप्त किया जा रहा है।
प्रत्येक दिन अलग–अलग रोगों के उपचार हेतु विशेष योग शिक्षा से रासेयो के स्वयंसेवकों एवं सम्मिलित हुए विभिन्न प्रतिभागियों को विशेषज्ञों द्वारा उचित मार्गदर्शन एवं मनोबल भी प्राप्त हो रहा है। योगाभ्यास 3.0 के आयोजन का मुख्य उद्देश्य विभिन्न रोगों के औपचारिक विधियों एवं समाधानों को प्रेषित करना है। यह कार्यक्रम सात दिनों के लिए ऑनलाइन माध्यम से संचालित किया जा रहा है तथा इच्छुक व्यक्ति इस शिविर से जुड़ने के लिए रासेयो के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लिंक प्राप्त कर सकते हैं।
यह कार्यक्रम संस्था के निदेशक डॉ पी. बी. देशमुख, कार्यक्रम अधिकारी गोविन्द सिंह एवं डॉ अचला जैन के मार्गदर्शन में सम्पन्न हो रहा है।