सरायपाली : सरपंच को प्रताड़ित करने वाली सचिव के तबादले पर रोक, शासन के निर्देश का मिला फायदा, गाँव के विकास में होगी बाधा.
हेमन्त वैष्णव. महासमुंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी तबादले के आदेश पर सरायपाली जनपद की एक सचिव ने न्यायालय अपर आयुक्त से स्टे ले आया है. जिसके बाद सरायपाली जनपद के ग्राम पंचायत गिरसा की सचिव के तबादले पर रोक लग गई है.
ग्राम पंचायत गिरसा की प्रताड़ित और दिव्यांग सरपंच के शासन-प्रशासन से लगातार मांग के बाद जिला पंचायत महासमुंद सीईओ ने 10 मई को आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से सचिव ज्योति पटेल का तबादला कर दिया था. जिसके बाद सचिव ने प्रभार ना छोड़ते हुए 15 दिन बाद 25 मई को तबादले के आदेश पर रोक ले आई.
सचिव ज्योति पटेल पर सरपंच को प्रताड़ित करने और गाँव के विकास कार्य में रूचि नही दिखाने का आरोप है. जिससे गाँव में विकास कार्य सही तरीके से नही हो पा रहा है. जिसके चलते सचिव के तबादले की मांग की गई थी. लेकिन शासन के दिशा-निर्देश अनुसार पति-पत्नी को एक ही स्थल पर रहने हेतु स्थान्तरण की सुविधा दी गई है. जिसके तहत तबादला का यह आदेश प्राकृतिक न्याय सिद्धांतों के विपरीत है.
सचिव ज्योति पटेल के पति शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के पद पर सरायपाली जनपद के एक गाँव में पदस्थ है. जबकि ज्योति पटेल का तबादला बसना जनपद मुख्यालय कर दिया गया है. नियम के अनुसार पति-पत्नी को एक ही स्थल पर कार्य करने की सुविधा दी गई है. जिसके कारण सचिव के तबादले पर रोक लग गया. शासन का यह दिशा-निर्देश सचिव के लिए तो फायदेमंद है लेकिन ग्राम पंचायत गिरसा और वहां के ग्रामीणों के विकास में यह बाधा है.
आपको बता दें कि तबादले के आदेश के बाद अपने बीमार होने की जानकारी देकर 10 दिन का अवकाश लेते हुए सचिव ने नए सचिव को प्रभार नही सौंपा और इसी बीमारी में 10 दिन के अवकाश के बीच सचिव रायपुर आयुक्त के पास पहुंचकर अपने तबादले पर रोक ले आई.
रोक के बाद शायद अब सचिव फिर से इसी पंचायत में पदस्थ हो जाएगी, ऐसे में इस सचिव के हौसले और भी बुलंद होंगे. यह सचिव गाँव के विकास कार्यों में ऐसे ही रूचि नही दिखाती है इस रोक के बाद उसे मनमर्जी करने की और छुट मिल जाएगी. ऐसे सचिवों को तबादला नही बर्खास्त कर देना चाहिए, ये ना केवल एक ग्राम पंचायत बल्कि देश के विकास में भी बाधा हैं.
जानकारी के अनुसार तबादले के आदेश पर रोक के बाद सरपंच ने इस मामले में स्थानीय विधायक किस्मतलाल नन्द से हस्तक्षेप करने की गुहार की है. जिसपर विधायक द्वारा मुख्यमंत्री के संज्ञान में इस मामले को लाने की बात कही गई है.