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झोपड़ी में लगी भीषण आग, जिंदा जलने से एक ही परिवार के सात लोगों की मौत

डेस्क। पंजाब के लुधियाना में झोपड़ी में आग लगने से एक ही परिवार के सात लोग जिंदा जल गए हैं। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। घटना मंगलवार रात डेढ़ बजे के बाद की बताई जा रही है। यह परिवार मक्कड़ कालोनी में एक झोपड़ी में रहता था।

अचानक भीषण आग लगने के बाद चीख पुकार मच गई। स्थानीय लोगों ने बचाने की कोशिश की और दमकल की गाड़ियां भी पहुंची लेकिन जब तक आग पर काबू पाया जाता तब तक परिवार के सातों लोग जिंदा जल चुके थे। सहायक पुलिस आयुक्त (पूर्व) लुधियाना, सुरिंदर सिंह ने कहा कि वे प्रवासी मजदूर थे और यहां टिब्बा रोड पर नगर पालिका कचरा डंप यार्ड के पास अपनी झोपड़ी में सो रहे थे। टिब्बा थाने के एसएचओ रणबीर सिंह ने पीड़ितों की पहचान दंपती और उनके पांच बच्चों के रूप में की है।


इनकी गई जान

सुरेश सैनी (55), रोशनी देवी (50), राखी कुमारी (15), मनीषा कुमारी (10), चंदा कुमारी (08), गीता कुमारी (06), सनी (02) की मौत हुई है। वहीं हादसे में सिर्फ राजेश कुमार ही जिंदा बचा है। ये सभी बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले थे। खाना खाने के बाद परिवार रात आठ बजे सोया था


शार्ट सर्किट को बताया जा रहा आग लगने की वजह

शुरुआती तौर पर शार्ट सर्किट को आग लगने की वजह माना जा रहा है। माना जा रहा है कि शार्ट सर्किट की वजह से आग भड़की और पूरे परिवार को लील लिया। लुधियाना की डीसी सुरभि मालिक और पुलिस कमिश्नर कौस्तब शर्मा भी मौके पर पहुंचे। पुलिस व फॉरेंसिक टीम जांच में जुटी हैं।

परिवार में केवल राजेश ही बचा


सात लोगों का हंसता खेलता परिवार चंद मिनटों में तबाह हो गया। परिवार में सिर्फ राजेश कुमार ही बचा है। मंगलवार की रात वह अपने दोस्त के घर सोने चला गया था। यही वजह है कि उसकी जान बच गई। राजेश ने बताया कि पिता सुरेश कुमार कबाड़ी का काम करते थे। उधर, पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।

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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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