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कई देश सूचना के प्रवाह को रोक रहे....गूगल सीईओ सुंदर पिचाई ने बताया, कौन सी दो चीज़ें भविष्य में लाएंगी क्रांति

गूगल के प्रमुख सुंदर पिचाई ने चेतावनी दी है कि दुनियाभर के कई देशों में इंटरनेट की स्वतंत्रता पर हमले हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस से होने वाले बदलाव आग, बिजली या इंटरनेट से भी ज़्यादा प्रभावी होंगे. पिचाई से जब पूछा गया कि इंटरनेट का चीनी मॉडल - जिसमें सरकार के हाथ में बहुत ताक़त है और कड़ी निगरानी रखी जाती है, कितना सही है, तो पिचाई ने बिना चीन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्र और मुक्त इंटरनेट पर "हमला किया जा रहा है." हालांकि उन्होंने इसके बाद कहा, "हमारे प्रमुख उत्पादों और सेवाओं में से कुछ भी चीन में उपलब्ध नहीं हैं."

पिचाई के अनुसार, अगले 25 सालों में दो चीज़ें क्रांति लेकर आएँगी, वो हैं, आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस और क्वॉन्टम कंप्यूटिंग.आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "मैं इसे मानवता की बनाई जाने वाली सबसे बेहतरीन तकनीक के रूप में देखता हूँ."आप आग, बिजली या इंटरनेट के बारे में अभी जैसा सोचते हैं, ये वैसा ही होने वाला है. मुझे लगता है उनसे भी बेहतर"

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम मनुष्यों की तरह काम काम करने के लिए बनाया जाता है, ख़ासतौर पर किसी विशेष प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए. अभी भी कई ऐसे सिस्टम काम कर रहे हैं.क्वॉन्टम कंप्यूटिंग एक पूरी तरह से अलग कॉन्सेप्ट है. साधारण कंप्यूटिंग बाइनरी पर आधारित हैं: 0 या 1. इनके बीच कुछ नहीं होता. इन्हें बिट्स कहा जाता है.क्वॉन्टम कंप्यूटर क्यूबिट्स पर काम करते हैं. इससे एक पदार्थ को एक ही समय में कई स्टेट में होने की संभावना बनती है. इसे समझना मुश्किल है लेकिन ये दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.हालांकि पिचाई समेत तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ये सभी जगह काम नहीं आएँगे.

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे "कॉर्पोरेट ग्लोबल मिनिमम टैक्स पर हो रही बातचीत से उत्साहित हैं."इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी ने पिछले एक दशक में आमदनी का 20 प्रतिशत तक टैक्स चुकाया है, जो कई कंपनियों की तुलना में अधिक है. इसमें से ज़्यादातर टैक्स अमेरिका में दिया जाता है.अन्य बड़े मुद्दों को लेकर भी गूगल जाँच का सामना कर रहा है जैसा डेटा और प्राइवेसी और सर्च के क्षेत्र में एकाधिकार.एकाधिकार पर बात करते हुए पिचाई यह तर्क देते हैं कि गूगल एक मुफ़्त उत्पाद है, और यूज़र्स आसानी से कहीं और जा सकते हैं.ऐसा ही तर्क फ़ेसबुक भी पहले दे चुका है.

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