जैनमुनि जिनेश सरायपाली के बाद 3 अप्रेल को 550 किमी की पदयात्... - CG Sandesh

जैनमुनि जिनेश सरायपाली के बाद 3 अप्रेल को 550 किमी की पदयात्रा कर ओडिशा के कैसिंगा में चातुर्मास पर अग्रसर होंगे

आचार्य श्री महाभ्रमण के शिष्य मुनि जिनेश कुमार ने स्थानीय जैन कॉलोनी में विनोद जैन के निवास पर प्रेस वार्ता रखी। मुनि ने बताया की उनका न तो कोई मंदिर है और ना कोई मठ है ना हीं कोई ठहरने का स्थाई ठिकाना। वे भगवान महावीर के संदेश को घर-घर पहुंचाने निकले हैं। अपना सारा सामान स्वयं उठाकर पैदल ही चलते हैं। अब तक उन्होनें राजस्थान, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, पोंडुचेरी, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि कई प्रदेशों से होकर करीब 50 हजार किमी की पदयात्रा पूरी कर ली है। जैनमुनि जिनेश सरायपाली के बाद 3 अप्रेल को 550 किमी की पदयात्रा कर ओडिशा के कैसिंगा में चातुर्मास पर अग्रसर होंगे।

उन्होनें कहा कि अच्छा जीवन जीने के लिए व मनुष्य जीवन को सफल बनाने के लिए सहनशीलता, श्रमशीलता, संयम, सेवा व सकारात्मक चिंतन जरूरी है। मुनि जिनेश कुमार ने कहा कि व्यक्तित्व के निर्माण में भावों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। अच्छे भाव ही व्यक्ति को पूर्णता की ओर ले जाता हैं। सकारात्मक प्रभाव नकारत्मकता को समाप्त करते है। क्रोध, लोभ, राग, द्वेष आदि जब तक यह वृत्तियां रहती हैं तब तक व्यक्ति अध्यात्म की दिशा में प्रस्थान नहीं कर सकता और ना ही अच्छा जीवन जी सकता है। ध्यान के जरीए व्यक्ति अपना उत्थान कर सकता है। भोर में ध्यान करने से कई लोग शरीर में गांठ कैंसर आदि कई रोग से स्वयं ही ठीक हुए है। उन्होंने आध्यात्मिक जानकारी देते हुए लोगों को सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। सद्भावना, नैतिकता, मानवता व नशा मुक्त के संबंध में उन्होंने संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नशा नाश का जड़ है। नशे से बड़े-बड़े परिवार बर्बाद हो जाते हैं। मनुष्य असिमित इच्छाओं के बंधन में बंधा होता है। सभी सुख सुविधा होने के बावजूद भी मनुष्य की इच्छाएं समाप्त नहीं होती। उन्होंने लोगों को चरित्रवान बनने की प्रेरणा दी। वर्तमान में कोरोना संक्रमण के कारण शासन के द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने की बात भी कही।

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