छत्तीसगढ़ में है एक ऐसा प्राचीन सूर्य मंदिर जिसमें नहीं है सूर्यदेव की मूर्ति
छत्तीसगढ़
के कांकेर जिले के अंतागढ़ के ग्राम टेमरुपानी में एक प्राचीन सूर्य मंदिर है. इस
मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार सेसा कार्यक्रम के दिन खुलते हैं परन्तु विशेष
परिस्थिति जब अकाल पड़ रही हो तो बारिश के लिए प्रार्थना करने के लिए कपाट खोले
जाते हैं. इस मंदिर में सूर्यदेव की मूर्ति नहीं है इसका निर्माण कब हुआ इसकी
जानकारी नहीं है. आदिवासी परंपरा के अनुसार यहाँ सूर्यदेव डांग के रूप में उपस्थित
हैं, डांग को सूर्यदेव का प्रतिक माना जाता है.
सूर्यदेव के नाम से दो गावों में दस एकड़ खेत है. इन्ही खेतों में उगी फसलों से अगले वर्ष किसान बुआई की शुरुआत करते हैं. हर सात साल में यहाँ जात्रा का आयोजन किया जाता है जिसे पोड़दगुमा सूर्यदेव जात्रा कहा जाता है. इस जात्रा में न केवल बस्तर संभाग बल्कि अन्य राज्यों एवं समाज के लोग शामिल होते हैं.
सेसा कार्यक्रम के दिन डांग को बाहर निकाल कर मंदिर से थोड़ी दूर देवस्थल में रखा जाता है और पारंपरिक रूप से पूजन किया जाता है तथा मंदिर के नाम से स्थित खेत से होने वाली फसल सूर्यदेव को अर्पित करने के बाद सेसा कार्यक्रम में पहुँचने वालों को दोने में प्रदान किया जाता है.