कंधों भर पानी में मरीज से लेकर के छात्रा करते है नाला पार, आखिर कब मिलेगा यहाँ के ग्रामीणों को राहत.
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत ग्राम छिबर्रा आश्रीत ग्राम सुकड़ा पलसापाली नाला में पूल की सक्त आवश्यकता है.
आजादी के बाद और मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बन चुका है. और अब सरायपाली को जिला बनाए जाने की मांग भी की जा रही है. इसके आलावा सरायपाली-बसना क्षेत्र में रेल्वे सुविधा मार्ग भी उपलब्ध कराये जाने की मांग की जा रही है. लेकीन यहां अब भी ऐसे कई गाँव मौजूद है जहाँ ग्रामीणों को 1 पुलिया भी नही मिल पाता. जिससे ग्रामीणों को जान बचाने के लिए अस्पताल और बच्चो को स्कूल-कालेज जाने के लिए हर रोज बाढ़ से गुजर कर जाना पड़ता है.
ज्यादा समस्या तब होती है जब गांव कोई ज्यादा ही गंभीर हो और उसे अस्पताल पहुँचाना हो, ऐसे गांव में रहने वाले लोगों की जान आफत में आ जाती है. ग्राम सुकड़ा पलसापाली के नाला में स्टॉप डेम का पानी बहते रहता है और बरसात के दिनों में यहां बाढ़ जैसे स्तिथि पैदा हो जाती है. ज्यादा पानी होने के कारण कई दिनों तक 2 गांव के लोग बलौदा और सरायपाली शहर नही आ पाते है. विधार्थियो से लेकर मरीजो तक गांव के अंदर ही रहते है या फिर बड़े-बड़े टीव के सहारे नाला पार करके शहर की ओर रुख करते है.
बताया गया कि ग्राम छिबर्रा आश्रीत ग्राम सुकडा पलसापाली में बाढ़ के कारणों से राशन पानी का भी कई दिनों तक नही मिल पाता है. ग्रामीणों ने कई बार सरकार से मांग किया कि राहत के लिए पुलिया बनाया जाए, लेकिन इन ग्रामीणों की सुनने वाला नही है. और ना ही इनकी आवाज को सरकार के कानों तक पहुँच रही है. ऐसे में एक टिकेश्वर मिश्रा जो कि सामाजिक कार्यकर्ता है, उनके द्वारा लोगो के लिए आवाज उठाया गया है. और पुलिया की मांग की जा रही है.