छत्तीसगढ़ सरकार में पत्रकार नही रहे सुरक्षित ...कहीं हो रहा प... - CG Sandesh

छत्तीसगढ़ सरकार में पत्रकार नही रहे सुरक्षित ...कहीं हो रहा प्राणघातक हमला, तो कहीँ फंसाया जा रहा झूठे केश में..!पत्रकारों के सम्मान की लड़ाई लड़ने का वक्त..

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की भूपेश सरकार ने पत्रकारों को अपना किया वादा आज तक पूरा नहीं किया । पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने को लेकर आज तक केवल प्रक्रिया ही चल रही है जबकि सरकार को बने एक लंबा वक्त बीत गया है । इसका साफ मतलब यह है कि सरकार पत्रकार सुरक्षा कानून छत्तीसगढ़ में लागू नहीं करना चाहती ।
आज की घटना जो कांकेर में हुई वह बेहद निंदनीय और चिंतनीय है प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार कमल शुक्ला को इस तरह सरे बाजार पीटा जाना भद्दी भद्दी गालियां दिया जाना यह दर्शाता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की चीज लगभग शून्य हो चुकी है।...

देशभर में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच शनिवार को छत्तीसगढ़ के कांकेर के एक वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता कमल शुक्ला को भी निशाना बनाया गया और उनके साथ मारपीट की गई. कथित तौर पर सत्ताधारी दल कांग्रेस के दबंगों ने शुक्ला के साथ गाली-गलौच की और उनकी पिटाई भी.

पुलिस थाने के बाहर जब उनकी पिटाई की जा रही थी उस वक्त स्थानीय पुलिस भी वहां मौजूद थी. ये घटना कांकेर में उस वक्त की है जब कमल शुक्ला पहले से ही कांग्रेस पार्टी के पार्षदों और दबंगों द्वारा पीटे गए एक अन्य पत्रकार से मिलने कोतवाली थाना पहुंचे थे.

शुक्ला पीड़ित पत्रकार और वहां मौजूद उसके अन्य साथियों के साथ मिलकर अभियुक्तों के खिलाफ पुलिस से कार्यवाई की मांग कर रहे थे. स्थानीय लोगों और पत्रकारों द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार शुक्ला के थाना पहुंचने से पहले ही वहां कांग्रेस पार्टी के दबंगों की करीब 300 समर्थकों की भीड़ इकट्ठा थी.

शुक्ला द्वारा पत्रकारों की अगुवाई किये जाने पर वहां मौजूद सत्तारूढ़ दल के स्थानीय नेता गणेश तिवारी उनसे गाली गलौज करने लगा. इस बीच थाना प्रभारी ने वहां पर पहले से मौजूद अन्य पत्रकारों को थाने से बाहर निकाल दिया. तभी कांग्रेसी नेताओं ने कमल शुक्ला के साथ मारपीट करना शुरू कर दिया. उनको मारते-मारते थाने से घसीट कर बाहर निकाला गया जिसमें उनके सिर पर गहरी चोट आई है.

घटना की पुष्टि करते हुए कांकेर पुलिस अधीक्षक एमआर अहिरे ने cgsandesh को बताया, ‘पत्रकार कमल शुक्ला के साथ मार पीट की गई है जिसमें उनके सिर पर चोट आई है. एफआईआर दर्ज कर लिया गया है और अभियुक्तों के खिलाफ जल्द कार्यवाई की जाएगी....

चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के लोगों पर इस तरह अगर हमला किया जा रहा है तो आम आदमी का क्या होगा सोचनीय विषय है । पिछले दिनों महासमुंद जिले रायगढ़ जिले रायपुर जिले में भी घटनाएं हुई आए दिन पत्रकारों के साथ घटनाएं हो रही हैं या उन्हें झूठे मामलों में फसाया जाता है । कांग्रेस की सरकार से पत्रकारों को उम्मीद थी कि सरकार शीघ्र अति शीघ्र पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करेगी लेकिन पत्रकार सुरक्षा कानून लागू ना होने की वजह से पत्रकार लगातार छत्तीसगढ़ में प्रताड़ित हो रहे हैं । कांकेर में हुई आज की घटना के बाद जरूरत है कि पूरे प्रदेश के पत्रकार एक हो और अपने सम्मान की लड़ाई लड़ें ।

अलग-अलग संघ संगठन उनकी विचारधाराएं इन सब को एक किनारे रख कर एक मंच पर आकर सभी कलाकारों को अपने सम्मान की लड़ाई लड़ने का वक्त अब आ चुका है । अगर अभी हम चुप बैठे तो निश्चित तौर पर आए दिन हर जिलों में इस तरह के असामाजिक तत्वों द्वारा चौक चौराहों पर पत्रकारों की पिटाई होना या उनकी हत्या हो जाना आम बात हो जाएगी ।
साथियों वक्त आ गया है जागने का एक होने का सम्मान की लड़ाई लड़ने का ।

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