कोरोना से लड़ते हुए एक और डॉक्टर की गई जान .
कोरिया जिले के एक संविदा आयुर्वेदिक डॉ दीपेंद्र सिंह सिकरवार ने कोरोना से लड़ते हुए अपने जान की कुर्बानी दे दी है। उनकी शहादत को सादर नमन।
अब एक सुलगता सवाल ये है कि उनका शहादत उनके परिवार पर क्या भूचाल लाएगा ? एक पति, एक पिता, एक बेटे की मौत से परिवार कैसे उबर पायेगा ? बच्चों का लालन-पोषण, मां-बाप की देख-रेख और पत्नी की गृहस्थी का गुजारा कैसे चलेगा? क्या उनके पत्नि को सरकारी नौकरी मिल पाएगी? क्या उनके परिवार को पेंशन मिल पाएगा?
ये सवाल आज हर एक संविदा कर्मचारी के मन मे घर कर गया है। एक धर्मसंकट उनके विचारों में कौंध रहा है। कोरोना वॉरियर के ऐसे असुरक्षा और हताश मनोबल से कोरोना के खिलाफ लड़ाई आखिर कैसी लड़ी जाएगी। जब किसी युद्ध मे सैनिक ही भाड़े पर लिए जाएंगे, तो दुश्मन आपके बाड़े याने घर तक पहुंचेगा ही।
अतः सरकार से विनम्र निवेदन है कि इस विषय पर अत्यंत संवेदनशीलता से विचार करें।
डॉ. इकबाल हुसैन, प्रेसीडेंट, सीडा