आँधी तूफान एवं बारिश से टूटे 50 विद्युत पोल, 57 गाँवों में छाया रहा अंधेरा
दिन-रात एक कर बिजली चालू करने जुटे हैं विद्युत कर्मी
बिजली गुल होने से लालटेन के सहारे पढ़ने पर
मजबूर है विद्यार्थी
सरायपाली. दो दिनों तक चले आँधी तूफान व बारिश से विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है. जगह-जगह विद्युत पोल क्षतिग्रस्त हो गए हैं अइदौर कहीं-कहीं विद्युत तार पर पेड़ गिरने से भी विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई है. इसके अलावा कई स्थानों पर सड़क पर पेड़ गिरने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है. वहीं धान खरीदी केन्द्रों में स्टेग में लगे कैप कव्हर भी तूफान के सामने नहीं टिक पाये और इस कदर फट गए कि वे पूरी तरह अनुपयोगी हो गए हैं. शहर के ही कुछ स्थानों पर बिजली गुल होने के कारण पानी भी नसीब नहीं हुआ है. बिजली गुल होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है, वे एकाग्र होकर नहीं पढ़ पा रहे हैं. बार-बार बिजली चले जाने के कारण रात में उन्हें लालटेन का सहारा लेना पड़ रहा है.
विगत दो-तीन दिनों से चल रहे तेज आँधी तूफान से
पूरा शहर तहस नहस हो गया है और कई स्थानों पर पेड़ गिरने व विद्युत पोल टूटने की भी
जानकारी मिली है. सरायपाली क्षेत्र में आँधी तूफान एवं बारिश से शहर के 33 केव्ही
उच्च दाब लाईन में विगत 5-6 मार्च की
रात्रि को 7 पोल क्षतिग्रस्त होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित रही,
जिसे कल शुक्रवार को सुबह 3 बजे नया पोल बदलकर बहाल किया गया. इसी
तरह बलौदा एवं छुईपाली विद्युत वितरण केन्द्र के अंतर्गत 42 एवं 15 गाँवों में
विद्युत आपूर्ति प्रभावित रही.
छुईपाली केन्द्र में उच्च दाब के 7 और निम्न दाब के
12 पोल क्षतिग्रस्त हुए थे. इसमें नये पोल लगाकर 12 गाँवों में विद्युत आपूर्ति
बहाल कर दी गई थी एवं शेष गाँवों में भी पोल लगाने का कार्य द्रुत गति से चल रहा
था. बलौदा वितरण केन्द्र के अंतर्गत उच्च दाब तोषगाँव क्षेत्र में 11 पोल,
निम्न दाब लाईन के 12 पोल क्षतिग्रस्त हुए थे,
जिसमें से 42 गाँवों की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई थी. कल शाम तक
36 गाँवों की विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी गई थी. वहीं सागरपाली क्षेत्र में 33
केव्ही का एक पोल क्षतिग्रस्त हुआ था. विगत तीन दिनों से पेयजल,
निस्तारी के लोगों को तालाब का सहारा लेना पड़ा है,
वहीं इलेक्ट्रानिक सामान, मोबाईल,
अन्य उपक रण भी केवल शो-पीस बन गए हैं. मोबाईल चार्जिंग करने के लिए
भी लोगों को अपने मित्रों व रिश्तेदारों के घर जाना पड़ गया था.
शहर में पेयजल के लिए भी इस प्रकार हा-हा कार मचा कि लगभग सभी वार्डों के लोग टैंकर की मांग करने लगे. नगर पालिका का टैंकर भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पायी. कुछ लोगों ने बताया कि कई बार फोन लगाने के बाद भी टैंकर नहीं पहँुचा. तेज आँधी तूफान के कारण धान खरीदी केन्द्रों में लगे स्टेग के कैप कव्हर बुरी तरह से फट कर अनुपयोगी हो गए हैं. जिससे खरीदी प्रभारियों को अतिरिक्त नुकसान हुआ है और मजबूरी वश नये कैप कव्हर खरीदना पड़ा है. कैप कव्हर फट जाने से धान खुले आसमान में आने के कारण काफी मात्रा में भीग गए हैं, जिसपर अंकुरण होने का खतरा मंडरा रहा है. धान खरीदी केन्द्र सेमलिया में इस तरह की स्थिति देखने को मिली है.