नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में 2 ग्रामीणों की गला रेतक... - CG Sandesh

नक्सलियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में 2 ग्रामीणों की गला रेतकर की हत्या

सुकमा- छत्तीसगढ़ के सुकमा में शुक्रवार देर रात नक्सलियों ने ग्रामीणों को बुरी तरह से पीटा। एक महिला को पीट.पीटकर निर्वस्त्र कर दिया और उसके सामने ही पति और एक अन्य ग्रामीण की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या कर दी। नक्सलियों को ग्रामीणों पर पुलिस मुखबिरी करने का शक था। पिटाई से 2 ग्रामीणों की हालत गंभीर है। घटना चिंतलनार क्षेत्र की है।

चिंलतनार क्षेत्र के पास पुजारीपारा और तोंगपाल के कोलमकोंटा में शुक्रवार देर रात कई हथियारबंद नक्सली पहुंचे। यहां उन्होंने माड़वी हुर्रा, मिचाकी हड़मा,मड्‌डा कवासी और लखमा कुंजाम को घर से बुलाया और पिटाई शुरू कर दी। इस दौरान जब मिचाकी हड़मा की पत्नी मिचाकी मंगली बचाने पहुंची तो नक्सलियों ने उसे भी बुरी तरह से पीटा। नक्सलियों ने पिटाई कर मंगली को निर्वस्त्र कर दिया।

इसके बाद मंगली के सामने ही उसके पति मिचाकी हड़मा की टंगिया से गला रेतकर हत्या कर दी। नक्सलियों ने माड़वी हुर्रा को भी टंगिया से मार डाला। मड्‌डा कवासी और लखमा कुंजाम को इतनी बुरी से पीटा गया है कि दोनों की हालत गंभीर है। हड़मा को नक्सलियों से संबंधों के चलते पुलिस ने 2 बार गिरफ्तार किया था। इस दौरान उसे जेल भेजा गया। करीब डेढ़ साल जेल में रहा। अब नक्सलियों ने पुलिस का मुखबिर बताकर उसकी हत्या कर दी।

भाई ने सरेंडर किया, बहन पुलिस भर्ती की तैयारी कर रही इसलिए पिटाई

नक्सलियों ने जिन ग्रामीणों को पीटा है उनमें मड्‌डा कवासी भी शामिल है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मड्‌डा का भाई पहले नक्सली था, लेकिन बाद में उसने सरेंडर कर दिया और मुख्य धारा में शामिल हो गया। वहीं, उसकी बहन अब पुलिस भर्ती के लिए तैयारी कर रही है। इससे बौखलाए नक्सलियों ने मड्डा को निशाना बनाया और उस पर पुलिस मुखबिर होने की बात कहते हुए बुरी तरह से पीटा।

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पल्लवी मंडावी

पल्लवी मंडावी पत्रकारिता (जर्नलिज्म) में स्नातक हैं और उन्हें मीडिया के क्षेत्र में 7 वर्षों का लंबा और गहन जमीनी अनुभव है। एक प्रखर स्वतंत्र लेखिका (Independent Writer) के रूप में विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों में उनके लेख प्रकाशित होते रहते हैं। पल्लवी सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर बेहद बेबाकी से लिखती हैं और अपनी धारदार लेखनी के माध्यम से जनसरोकार की आवाज़ को प्रमुखता से सबके समक्ष रखती हैं।
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