राशन कार्ड से नाम कटने के बाद चावल के लिए भटक रहे हैं अनाथ बच्चे
सरायपाली. राशनकार्ड नवीनीकरण होने के बाद नाम कट जाने से ग्राम जोगनीपाली के दो अनाथ नाबालिक बच्चों को भूखे मरने की नौबत आ गयी है. पूर्व में बच्चों के माता के नाम पर नीला राशन बना था. लेकिन उसकी मृत्यु हो जाने के बाद नाबालिक बच्चों के नाम से कार्ड नवीनीकरण नही हुआ. जिसके चलते इन्हें चावल के लिए भटकना पड़ रहा है.
शहर के कुछ बुद्धिजीवियों ने इन बच्चों की दयनीय स्थिति को देखते हुए विधायक से निवेदन कर मुख्यमंत्री से राशन कार्ड का लाभ दिलाने की मांग की है.
समीपस्थ ग्राम जोगनीपाली के दो अनाथ बच्चे सागर चैहान 8 वर्ष तथा शुभम चैहान 6 वर्ष के पिता सियानंद चैहान की मृत्यु 2016 में हो गयी. वहीं उसके माता रितिया चैहान की मृत्यु वर्ष 2018 में हुई. पूर्व में बच्चों की मां के नाम पर नीला कार्ड से परिवार को चावल मिलता था.
महिला मुखिया की मौत हो जाने के बाद सदस्य संख्या में बच्चों का नाम दर्ज होने के कारण नियमित चावल मिल रहा था लेकिन विगत समय में हुए राशन कार्ड नवीनीकरण होने के उपरांत मुखिया सदस्य की मृत्यु हो जाने के कारण कार्ड में वयस्क सदस्य नही होने से नाबालिक बच्चों के नाम से कार्ड नही बना. इसके बाद से दोनों बच्चों के सामने परेशानी शुरू हो गयी. चावल मिलते तक उनके दादा दादी उसका ख्याल रखते थे पर अब चावल मिलना बंद हो जाने से उनकी भी मुश्किलें बढ़ गयी हैं. जिसके चलते वे भी बच्चों का बोझ उठा पाने में असमर्थ दिखाई दे रहे हैं. इसके चलते बच्चों के सामने भूखे मरने तक की नौबत आ गयी है.
बच्चों की स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप गुप्ता एवं अमृतलाल पटेल जोगनीपाली ने विधायक से गुहार लगाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर राशन का लाभ दिलाने हेतु मांग की है. विकासखंड में कई इस तरह के मामले देखने को मिल सकता है जहां राशनकार्ड धारी की मृत्यु हो जाने के उपरांत वयस्क सदस्य नही होने के कारण अनाथ बच्चों को चावल के लाले पड़ रहे हैं. नवीनीकरण के दौरान ही इनका राशनकार्ड अपात्र की श्रेणी में चला गया है.
नाम जुड़वाने में भी लाभ नही
दरअसल उनके दादा दादी का नीला कार्ड है जिन्हें 35 किग्रा चावल मिल रहा है. दो सदस्य और जोड़ने पर भी उतना ही चावल उन्हें प्राप्त होगा. इसी तरह दोनो बच्चों के चाचा के परिवार में 3 सदस्य हैं वे भी इसलिए नाम नही जोड़ना चाहते कि उनके नाम जुड़ने के बाद भी चावल- 35 किग्रा तक ही मिलेगा. शासन की योजना के मुताबिक नीला कार्ड में 5 सदस्य तक 35 किग्रा चावल प्रदाय किया जाना है.
पंचायत भी नही कर रहा सहयोग
जानकारी अनुसार पंचायत भी इन बच्चों के सहयोग के लिए आगे नही आ रहा है. पंचायत की दलील यह है कि इन्हें चावल दिया जाता है तो इस तरह के कई और लोग भी फिर मांग करेंगे.
इस संबंध में फूड विभाग के अधिकारी जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव से पूछे जाने पर बताया कि उनके पास जनपद पंचायत के माध्यम से आवेदन प्राप्त होता है तो उसे शासन को अनाथ बच्चों के राशनकार्ड बनाने हेतु पत्र लिखा जाएगा.