कार्यवाही के बजाय स्कूल से विधार्थियो को निकालने की दी जा रही सलाह.
एक पीड़ित ने जब फ़ोन के माध्यम से जिला शिक्षा अधिकारी को दोषी पाए गए सरायपाली अर्जुंडा के एकलव्य इंग्लिश स्कूल पर कार्यवाही के बारे में पूछा तो जिला शिक्षा अधिकारी ने पीड़ित पालक के ऊपर होने वाले जुर्म में न्याय दिलाने के बजाय पालको से उनके बच्चो को एकलव्य स्कूल से निकालने की सलाह दे दी.
जानकारी के अनुसार एकलव्य स्कूल में पढ़ने वाले एक छात्र के पिता चक्रधर पटेल बरपेलाडीह ने इस आसय के सांथ जिला शिक्षा अधिकारी को फोन किया कि एक पीड़ित छात्रा को न्याय मिलेगा तो बेटियां आगे बढ़ेंगी लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने बच्चो को दूसरे जगह एड्मिसन करवा लो जिस स्कूल में बोलेगे उस स्कूल में भर्ती करवाया दिया जाएगा. ऐसा सलाह पीड़ितों को दिया गया.
पालक ने जिला शिक्षा अधिकारी के उपर आरोप लगाते हुए कहा की पालक लोग फ़ीस पटाना चाहते है लेकिन बिना ऑन लाइन और बिना रसीद के फीस लिया जा रहा है. जिसके कारण स्कूल में भारी भरकम अवैध रकम जमा हो रहा है.
बताया जा रहा है कि छात्राओं को स्कूल द्वारा फीस के नाम पर प्रताड़ित किया जाता है लेकिन जब पालक फीस जमा करने पहुंचते है तो उन्हें फीस के बदले रशीद नहीं दिए जाने की बात कही जाती है.
एकलव्य स्कूल पालको और विधार्थियो को कंट्रोल में रखने के लिए और कई प्रकार के हथकंडे अपना कर टॉर्चर करता है. जैसे की बच्चो की छड़ी से पिटाई करना बच्चो को चौक चौराहा में उतार देना. एक प्रकार के ये दोनों आरोप में स्कूल दोषी पाया गया है जो की मानसिक और शारारिक प्रताड़ना है.
इसके पहले एकलव्य स्कूल में भारी शिकायतों पर अचानक छापा मार कार्यवाही करते हुए कई खामियां पाया गया और कैश काउंटर को सील किया गया था.
एकलव्य स्कूल में इन खामियों के बाहर आने और दोषी पाए जाने के पालक चक्रधर पटेल ने राष्ट्रीय राज्य बाल अधिकार संरक्षण को शिकायत किया था जहाँ आयोग ने संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को 16 अक्टूबर को एक नोटिस जारी करते हुए 7 दिवस के अंदर प्रकरण की वस्तुस्तिथि से कार्यलय को उपलब्ध कराने कहा गया है.
इस नोटिस में यह भी कहा गया था कि यदि स्कूल का जवाब संतोष जनक नही होगा तो स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है.