दूसरी कक्षा के बच्चों को बनाया मुर्गा, तीन बच्चों का हुआ स्वास्थ्य खराब, एक का रायपुर में चल रहा है ईलाज.
सरायपाली. प्राथमिक शाला मोखापुटका में विगत दिनों दूसरी के सभी बच्चों को स्कूल के सफाई कर्मचारी के द्वारा पढ़ने के लिए के कहा गया. बच्चों को पढ़ने नहीं आने पर उसने उन बच्चों को मुर्गा बनने के लिए कहा, जिससे 3 बच्चों का स्वास्थ्य खराब होने की जानकारी मिली है. उसमें से एक बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर उसे बसना एवं रायपुर भी इलाज के लिए ले जाना पड़ा.
घटना विगत शुक्रवार की बताई जा रही है. पालकों का आरोप है कि आखिर स्कूल के प्रधान पाठक एवं शिक्षक कहां गए थे, कि बच्चों को सफाई कर्मचारी पढ़ा रहा था. आखिर सफाई कर्मचारी को पढ़ाने एवं दण्ड देने की अनुमति किसने दी, यह भी एक बड़ा सवाल है.
जानकारी अनुसार शासकीय प्राथमिक शाला मोखापुटका में विगत शुक्रवार को दूसरी कक्षा के 10 से 12 बच्चों को वहां के सफाई कर्मचारी कुशन्त सिदार द्वारा पढ़ने के लिए कहा गया. जब कुछ बच्चे नहीं पढ़ पाए तो उक्त सफाई कर्मचारी ने शिक्षक का रोल निभाते हुए सभी बच्चों को लगभग एक घण्टा तक मुर्गा बनने के लिए दण्डित किया. स्कूली बच्चों ने बताया कि भोजन के पूर्व उक्त सफाई कर्मचारी द्वारा इस तरह के घटना को अंजाम दिया गया था.
शाम 4 बजे छुट्टी उपरांत रोते बिलखते बच्चे घर पहुंचे और स्कूल में हुई आपबीती से पालकों को अवगत कराया. अगले दिन पालकों रा शिक्षकों को घटना की जानकारी दी गई. लेकिन शिक्षकों द्वारा इस तरह की घटना घटित नहीं होने की बात कही गई. पालकों ने आगे बताया कि उनके बच्चों के पैर में सूजन हो गया था, जिसे ईलाज के लिए गांव के डॉक्टर के पास ले जाया गया. लेकिन दो-तीन दिन बाद भी बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने से डॉक्टरों द्वारा इलाज के लिए रायपुर ले जाने की सलाह दी गई.
पालकों द्वारा बसना एवं रायपुर बालाजी हॉस्पिटल ले जाकर ईलाज करवाया गया. घटना के बाद से स्वास्थ्य में पूरी तरह सुधार नहीं होने से निराकार पिता चुड़ामणी कक्षा दूसरी का छात्र स्कूल भी नहीं जा पा रहा है. इसी तरह गांव के ही उमेश पिता ललित पटेल, दुष्यंत पिता जयलाल पटेल का भी स्कूल में मुर्गा बनने के बाद स्वास्थ्य खराब हुआ था, जिसे गांव में ईलाज से ही स्वास्थ्य लाभ हो गया. जबकि निराकार का स्वास्थ्य अत्यधिक खराब होने के कारण अभी भी वह घर में स्वास्थ्य लाभ ले रहा है.
इस तरह स्कूल में दण्डित किए जाने से गांव के पालकों में भी शिक्षकों के प्रति रोष है और उनके द्वारा शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को शिकायत करने की भी कही जा रही थी.
जब इस संबंध में स्कूल के प्रधान पाठक अंजु पटेल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि इस तरह की कोई घटना स्कूल में घटित नहीं हुई है. मौसम के कारण बच्चों का स्वास्थ्य खराब हुआ है. जब पालकों ने भी उनके समक्ष बच्चों के मुर्गा बनने की बात को बताया तो प्रधान पाठक द्वारा उन्हें सूचना न देकर पत्रकारों को सूचना देने के लिए धमकाया गया. साथ ही गांव के राजनीतिक षडयंत्र को स्कूल में रूप दिए जाने की भी बात उन्होने कही.
इस संबंध में विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी आई पी कश्यप से पूछे जाने पर उन्होने बताया कि मामले की जानकारी मिली है, जांच उपरांत उचित कार्यवाही की जाएगी.