महासमुंद : क्या मोदी के नाम पर वोट देना जनता को पड़ रहा भारी ... - CG Sandesh

महासमुंद : क्या मोदी के नाम पर वोट देना जनता को पड़ रहा भारी ?

छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार आने के बाद सुशासन के नाम पर त्यौहार मनाया जा रहा है, और इसी सुशासन त्यौहार के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आती है जिसमे राज्य प्रशासन के अधिकारियों को एक विधायक के खिलाफ कार्रवाई के लिए काम बंद कर हड़ताल तक का आंदोलन करना पड़ता है।

क्या ये अधिकारी शासन के रवैये को भलि भांति समझते है, और आम जनता ने धृतराष्ट्र की तरह आंखों में पट्टी बांध लिया है। अगर कार्रवाई के लिए तहसीलदारों को हड़ताल करना पड़ा तो समझ लीजिए प्रदेश में जनता के क्या हालात होंगे।

कई मामले में प्रदेश का हाल ऐसा है लोग चिल्लाते हैं तो चिल्लाने दो हमे कोई फर्क नही पड़ने वाला है। चाहे वह महासमुंद जिले के पिथौरा क्षेत्र से भाजपा नेता के गिरफ्तारी की बात हो, या फिर किसानों के खाद की समस्या।  

ऐसे ही आम जनता की कई समस्याएं है, जिनके निवारण के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ता है, बावजूद इसके किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है। शिकायत निवारण के नाम पर सिर्फ पोर्टलों की संख्या बढाई जा रही है।

शिकायत के इतने पोर्टल होने बाद अब हाल ही में मुख्यमंत्री ने एक नया हेल्पलाइन खोला है, इतने सारे शिकायत पोर्टल पर निवारण नही बल्कि जनता के समय की बर्बादी हो रही है। कई मामले ऐसे है जहाँ शिकायत के बाद आवेदन सिर्फ दफ्तर-दफ्तर घुमते रहते हैं, किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती।

हमने खुद एक मामले में एक विभाग के खिलाफ प्रधानमंत्री के PG पोर्टल अथवा राज्य शासन के जनशिकायत पोर्टल पर शिकायत की थी, लेकिन शिकायत के 7 माह बाद भी स्थिति जस की तस है, कुछ पोर्टल पर की गई शिकायत केवल इधर से उधर घूम रही है, शासन और प्राशासन खुद ही अपनी जवाबदेही तय करने में असमर्थ है।

नवंबर 2023 का वह समय था, जब मोदी छतीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान घूम-घूमकर अपनी गारंटी बाँट रहे थे। इस गारंटी के तहत कुछ वादे तो पुरे हुए, लेकिन इस गारंटी और मोदी के नाम पर वोट देकर लोग शायद अब पछता रहे हैं। महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह जरुर दिए जा रहे है, लेकिन महंगाई इतनी बढ़ चुकी है कि अब ये 1000 रुपये गरीब की कटोरी में अठन्नी डालने जैसा है। यहाँ अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, वहीँ दिन ब दिन अब गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों का हाल बेहाल होता जा रहा है। किसान का प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान और 3100 रुपये प्रति क्विंटल जरुर दिया जा रहा है। लेकिन किसान भी समय पर खाद नहीं मिलने से नाराज है। किसान कहते हैं सोसायटी में तो खाद मिलता नहीं लेकिन निजी दुकानों पर तीगुने चौगुने दाम पर मिल जाता है।

इन सब मामलों को देखकर लगता है कि मोदी की गारंटी में जो भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति थी, वह पूरी तरह से नाकाम है, प्रदेश में भ्रष्टाचार का जो रूप अब देखने सुनने को मिलता है वो शायद पहले कभी ना देखा सुना गया हो। कमीशनखोरी की बात लोगों की जुबान पर अब आम बात हो चुकी है।

इतनी समस्या के चलते आम जनता किसी से अपना दर्द बयां नहीं कर पा रही है, क्योकि इस बार वोट मोदी के नाम पर दिया गया था, और जिनके नाम पर जनता ने वोट दिया उन्हें तो चॉकलेट खिलाने और अपने पार्टी का प्रचार करने से फुर्सत नही, वो कहाँ जनता की आवाज सुन पाएंगे।

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या मोदी के नाम पर वोट देना जनता को भारी पड़ रहा है ? सब सुधरने के लिए अब भी 2.5 वर्ष का समय है, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है । अगर हाल ऐसा ही रहा तो निश्चित ही भारत के नक़्शे से बीजेपी का पतन होता चला जायेगा।

भ्रष्टाचार को बढ़ावा और मुख्यमंत्री के जीरो टोलरेंस निति को चुनौती देता जनसंपर्क विभाग, पीजीपोर्टल, जनशिकायत, सीएमहेल्पलाइन लाइनपर की गई शिकायत सब बेअसर


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अविनाश नायक

मैं डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ और टेक-सैवी पत्रकार हूँ, जो पिछले 9 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद, सरायपाली, बसना और पिथौरा क्षेत्र की स्थानीय खबरों के साथ, देश-विदेश एवं शासकीय योजनायें, रोजगार अथवा बैंकिंग से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करता हूँ। पत्रकारिता के साथ-साथ मुझे Windows VPS सर्वर, IIS कॉन्फ़िगरेशन, SQL सर्वर और MVC, .NET, C# जैसी एडवांस तकनीकों का गहरा व्यावहारिक अनुभव है. इसके पूर्व करीब 6 वर्ष तक का मेरा सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामर के रूप में अनुभव रहा है.
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