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बसना : संगठित होंगे किसान तो मिलेगा हक और उचित दाम- उग्रसेन साखरे

फुलझर अंचल के किसानों के लिए इस वर्ष राहत और उम्मीद की बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय बाद कृषि उपज मंडी बसना में रबी सीजन की धान खरीदी शुरू होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाकर खुशी-खुशी घर लौट रहे हैं। इसी बीच किसान नेता उग्रसेन साखरे ने किसानों से संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया है। 

उन्होंने कहा कि फुलझर अंचल के बसना, सरायपाली और पिथौरा क्षेत्र के किसानों को अब शोषण के खिलाफ एकजुट होना होगा। गांव-गांव में किसान संगठन बनाकर सामूहिक रूप से संघर्ष करने से ही किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य और खेती-किसानी से जुड़ी सुविधाएं मिल सकेंगी। 

उग्रसेन साखरे ने बताया कि पिछले 5-6 वर्षों से कृषि उपज मंडी बसना में रबी धान खरीदी बंद थी। इसके कारण किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए राइस मिलर्स, व्यापारियों और कोचियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। वहां नमी, बदरा और अन्य बहानों से प्रति बोरी या प्रति क्विंटल धान में कटौती की जाती थी। कई बार किसानों को उधारी में धान बेचना पड़ता था और महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता था। कुछ किसानों को तो अपनी मेहनत की पूरी रकम तक नहीं मिल पाती थी।

इसी समस्या को लेकर किसानों ने इस वर्ष संगठित पहल करते हुए कृषि उपज मंडी बसना में ज्ञापन सौंपकर रबी धान खरीदी शुरू करने की मांग की थी। किसानों की मांग को गंभीरता से लेते हुए मंडी प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई कर खरीदी व्यवस्था प्रारंभ कर दी। सोमवार 25 मई को मंडी में पतला धान की अधिकतम बोली 1661 रुपये तक पहुंची, जिससे किसानों में उत्साह देखा गया।
हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि अभी भी बड़ी संख्या में किसान मंडी के बजाय निजी व्यापारियों और कोचियों को धान बेच रहे हैं, जिससे किसानों को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपनी उपज कृषि उपज मंडी बसना में लाएं, जहां पारदर्शी नीलामी, सरकारी तौल और नगद भुगतान की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक किसान मंडी में धान बेचेंगे तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कीमतें भी बेहतर मिलेंगी। 

उग्रसेन साखरे ने खरीफ सीजन से पहले खाद की बढ़ती कीमतों और कालाबाजारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि 267 रुपये की यूरिया खाद किसानों को 500 से 700 रुपये तक में बेची जा रही है। इसी प्रकार डीएपी, सुपर और पोटाश खाद भी शासन द्वारा निर्धारित दर से कई गुना अधिक कीमत पर बिक रही है। जबकि नियमों के अनुसार खाद विक्रेताओं को सरकारी दर पर ही खाद बेचने का लाइसेंस दिया जाता है। 

उन्होंने कहा कि यदि किसान संगठित होकर आवाज उठाएं तो प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ेगी और किसानों को शोषण से राहत मिलेगी। उन्होंने गांव-गांव में किसान संगठन बनाकर पूरे फुलझर अंचल स्तर पर मजबूत किसान मोर्चा तैयार करने की जरूरत बताई। अंत में उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे एकता और संगठन की ताकत को पहचानें, क्योंकि संगठित किसान ही अपने हक, सम्मान और उचित मूल्य की लड़ाई जीत सकता है।

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अविनाश नायक

मैं डिजिटल मीडिया विशेषज्ञ और टेक-सैवी पत्रकार हूँ, जो पिछले 9 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहित महासमुंद, सरायपाली, बसना और पिथौरा क्षेत्र की स्थानीय खबरों के साथ, देश-विदेश एवं शासकीय योजनायें, रोजगार अथवा बैंकिंग से सम्बंधित समाचार प्रकाशित करता हूँ। पत्रकारिता के साथ-साथ मुझे Windows VPS सर्वर, IIS कॉन्फ़िगरेशन, SQL सर्वर और MVC, .NET, C# जैसी एडवांस तकनीकों का गहरा व्यावहारिक अनुभव है. इसके पूर्व करीब 6 वर्ष तक का मेरा सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामर के रूप में अनुभव रहा है.
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