हाथियों के आतंक से बचने एक साथ लगाया जा रहा प्रायमरी और मिडिल स्कूल
कसडोल | कही शिक्षक की कमी है तो कही शिक्षक की अधिकता,दोनो ही मामले में बच्चों का भविष्य गर्त में,अधिकारियों को पता ही नही,कि कौन सा स्कूल कहा है, क्या ऐसे में शिक्षा का गुणवत्ता सम्भव है?
ऐसा ही मामला प्रकाश में आया,कसडोल विकाशखण्ड के रवान संकुल के तालझार मिडिल स्कूल का,यहां बच्चो की दर्ज संख्या कुल 6 है जिसमे 6वी में मात्र 2 छात्र 7वी कक्षा में 0 तथा 8वी में 4 छात्र ,शिक्षक की संख्या 2. इन 6 छात्र के लिए 2 शिक्षक पदस्थ है. यहां के शिक्षक स्वयं कहते है,की इतने कम दर्ज संख्या में हमे भी पढ़ाने का मन नही लगता, पर क्या करे ,नौकरी है करनी पड़ेगी, इतने कम बच्चो में कोई ट्यूशन भी नही पढ़ायेगा शिक्षक ने ये शब्द खुद ही कहे. यदि अधिकारियों द्वारा सही मैनजमेंट में ध्यान दे तो शिक्षा का स्तर बढ़ सकता है.यहां प्रायमरी स्कूल औऱ मिडिल स्कूल एक साथ लगते है,स्कूल में मात्र 3 कमरे है कक्षा 7 तक. अब कैसे बैठाते है हमे मालूम है,भेड़ बकरी जैसे कक्षा में बैठते है तो पढाई का अंदाजा कैसे होगा बताने की जरूरत नही.
इस स्कूल में कई समस्या है, यहां
कसडोल
में पदस्थ
विकाशखण्ड
अधिकारी आज तक स्कूल कहाँ है देखे तक नही, यहां प्राथमिक शाला जीर्णोद्धार के कगार पर था तो अधिकारियों ने नए भवन की स्वीकृति कर गांव से आधा किलोमीटर पर भवन का निर्माण करवा दिया,चुकि यह क्षेत्र हाथियों के आतंक से परेशान होने के कारण पालक उस नए भवन में अपने बच्चों को सुरक्षित महसूस नही करने के कारण एक साथ प्रायमरी और मिडिल स्कूल लगाया जा रहा है. विभाग की लापरवाही यही नही थमा प्रायमरी स्कूल का बाउंड्रीवाल को मिडिल स्कूल में बनवा दिया गया. और जहा जंगली जानवरों का खतरा है वहा बाउंड्रीवाल नही बना,इसमे विभाग की घोर लापरवाही होने की पुष्टि करता है.
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