नया तो दुर किराया में भी नहीं मिल रहा मकान इसलिए बकरियों के बीच पढ़ रहे बच्चे !
सरायपाली शहर के अंदर आंगनबाड़ी केन्द्र की स्थिती ऐसी है कि बच्चे बकरियों के बीच रहने को मजबूर है, अधिकारियों का कहना है कि शासन से जितनी राशि स्वीकृत हुई उसमे 18 की जगह केवल 11 ही बन पाए. बहरहाल अब कुछ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के घर के अंदर बरामदे में संचालित किये जा रहे है. जिसमें दर्ज संख्या के अनुसार कक्ष भी नहीं है.
नए भवन के लिए सुपरवाईजर, परियोजना अधिकारी एवं एसडीएम तक कार्यकर्ता लिखित में मांग कर चुके हैं, लेकिन आंगनबाड़ी के लिए भवन स्वीकृत नहीं हो रहा है. मोहल्ले में शासकीय भूमि नहीं होने के कारण भी भवन स्वीकृत न होने की बात सामने आ रही है.
जानकारी अनुसार नगर के वार्ड क्र.6 ईस्लाम मोहल्ला में 2 आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित हैं, जिसमें से आंगनबाड़ी केन्द्र ए में बच्चों की संख्या 35 है और कार्यकर्ता के घर में ही कक्षाएं लगती है. यहां एक छोटे कमरे में बच्चों को बिठाया जाता है. जिसमें कमरे के अनुसार बच्चों की दर्ज संख्या अधिक है. अगर सभी बच्चे आंगनबाड़ी पहुंचेंगे तो जगह भी कम पड़ेगा. लेकिन मोहल्ले में कहीं पर किराए का भवन नहीं मिलने से मजबूरीवश स्वयं के घर में ही आंगनबाड़ी संचालित करना पड़ रहा है. इसी तरह आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 6(ब) में भी 25 बच्चे अध्ययनरत हैं, जिन्हें एक छोटे से बरामदे में बिठाया जा रहा है. यहां भी बच्चों के अनुसार पर्याप्त जगह नहीं है.
इसके अलावा वहीं पर बकरियां भी बांधी जाती है. जिसकी बदबू से बच्चे हमेशा परेशान रहते हैं. यहां भी किराए का मकान नहीं मिलने की वजह से स्वयं के मकान में आंगनबाड़ी संचालित किया जा रहा है. दोनो आंगनबाड़ी केन्द्र में एक ही तरह की समस्या हैं. कल निरीक्षण के दौरान दोपहर 1 बजे तक दोनो आंगनबाड़ी केन्द्रों में एक भी बच्चे नहीं दिखे. केवल कार्यकर्ता एवं सहायिका ही नजर आए. जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने गृह भ्रमण के लिए जाने की बात कहते हुए बच्चों को भोजन के बाद जल्दी छुट्टी देने की बात कही.
जब शहर के ही आंगनबाड़ियों की यह स्थिति है तो ग्रामीण क्षेत्र में आंगनबाड़ी कैसे संचालित होता होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. भवन विहीन होने के बावजूद नवनिहालों के लिए नया भवन स्वीकृत होने का विकल्प भी मोहल्ले में दिखाई नहीं दे रहा है, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी चिंतित हैं. शासकीय भूमि के अभाव के चलते आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत नहीं हो रहा है.
किराए में नहीं मिल रहे भवन इसलिए घर में कर रहे हैं संचालित-कार्यकर्ता
इस संबंध में जब आंगनबाड़ी केन्द्र 6 ए के कार्यकर्ता अफरोज परवीन से पूछे जाने पर बताया कि पूर्व में मोहल्ले के एक शासकीय भवन में आंगनबाड़ी संचालित की जा रही थी, लेकिन आपत्ति होने के कारण घर में कक्षाएं लगाई जाती है. भवन के लिए सुपरवाईजर, परियोजना अधिकारी एवं एसडीएम तक लिखित में मांग कर चुके हैं. लेकिन स्वीकृत नहीं हो रहा है. इसी तरह आंगनबाड़ी केन्द्र 6 बी के नेहरू निशा ने बताया कि उनके द्वारा भी सभी अधिकारियों को भवन निर्माण के लिए लिखित में मांग किया जा चुका है. बावजूद आंगनबाड़ी के लिए भवन स्वीकृत नहीं हो रहा है. उच्चाधिकारियों के द्वारा शासकीय जमीन के अभाव में भवन स्वीकृत नहीं होने की बात कही जा रही है.
इस संबंध में परियोजना अधिकारी जी आर नारंग से पूछे जाने पर बताया कि पूर्व में शहर के 18 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए 1 लाख 75 हजार रूपए प्रति आंगनबाड़ी स्वीकृत हुआ था. लेकिन लागत राशि अधिक होने की वजह से राशि को मर्ज किया गया और 11 आंगनबाड़ी केन्द्र बनाए गए. भवन विहीन आंगनबाड़ी के संबंध में मार्गदर्शन के लिए जिला कार्यालय को लिखा गया है. नए भवन की स्वीकृति मिलते ही बच्चों की सारी समस्याएं दूर हो जाएगी.