जेसीबी लेकर खेल मैदान में गौठान बनाने पहुंचे अधिकारीयों से बिफरे ग्रामीण, कहा हमें तो पता नहीं कि यहाँ गोठान बनना है.
सरायपाली ब्लाक अंतर्गत आज जब गौठान बनाने को लेकर अधिकारी ग्राम पंचायत तोषगाँव के मनकी पहुंचे थे. तब ग्रामीणों को पता चल की यहाँ गौठान बनना है जेसीबी लेकर पहुचें इन अधिकारीयों पर ग्रामीणों ने अपना रोष व्यक्त किया और कुछ देर धरना देकर आन्दोलन भी किया.
महासमुंद जिले में छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वकांक्षी योजना नरवा, गरूवा, घुरूवा का काम चल रहा है. बीते सप्ताह मंगलवार को हुई एक बैठक में कलेक्टर ने आदेश दिया की महासमुंद में 10, सरायपाली में 6, पिथौरा में 10, बसना में 10 एवं बागबाहरा में 15 गौठान और चारागाह निर्माण के सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं. मगर इन गौठान को बनाने के लिए कई पंचायतों में भूमि को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है.
बसना ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत गौरटेक में शासकीय भूमि पर गौठान बनाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला थाना तक पहोंच गया. वहीं ग्राम पंचायत बरडीह में भी गौठान जिस जमीन पर बनाने की बात चल रही है वहां लोग वर्षों से काबिज है.
ताजा मामला है सरायपाली ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत तोषगाँव का जहाँ नरवा, गरूवा, घुरूवा के तहत गौठान बनाया जाना है. जिसके लिए पंचायत द्वारा तोषगाँव के आश्रित ग्राम मनकी का चयन हुआ है. मगर आज वहां के कुछ ग्रामीण आज इसके विरोध में आ गए.
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम मनकी में आज गौठान बनाने के लिए जेसीबी और कुछ पुलिस बल आये थे, मगर काम शुरू करने के पहले वहां विवाद हो गया. क़रीब 700 की आबादी वाले इस गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि जहाँ गौठान बनाने की बात की जा रही है यहाँ बच्चे खेलते है, निस्तारी के लिए जानवरों को यहाँ लाया जाता है इसके अलावा बीते कई वर्षों से उस जमीन पर हर वर्ष रथ यात्रा का त्यौहार में रथ वहीँ लाया जाता है. गौठान के बनने से गाँव में ऐसी कोई भी जमीन नहीं बचेगी जहाँ बच्चे खेल के साथ लोग अपना सार्वजनिक कार्य कर सकें.
ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में भी इस जमीन पर बिना गाँव के लोगों से सहमति लिए एक बिजली केन्द्र बना दिया गया है जिसके चलते वैसे ही ये जमीन कम हो चुकी है बावजूद इसके इसी गाँव का नाम प्रस्तावित किया गया जबकि तोषगाँव में इससे बेहतर जगह है गौठान बनाने के लिए. इसके साथ की ग्रामीणों ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो यह योजना कभी सफल नहीं हो पायेगी.
शायद शासन को आज भी इस बात की सटीक जानकारी नहीं कि कौन सी जमीन किसकी है कौन कहाँ कितने वर्षों से रह रहा है. और अगर कोई वर्षों से रह रहा है तो अब तक पट्टा ना बनना सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है क्योंकि लगातार ऐसे भी मामले सामने आये है जहाँ गलत तरीके से शासकीय भूमि को अपने नाम में किया गया है जिसके बाद गाँव में शासकीय भूमि नहीं रह जाती है.
गाँव में शासकीय भूमि के ना होने पर वहां कई प्रकार के विकास कार्य रुक जाते है. जैसे कि स्कूल का ना बन पाना, कॉलेज का ना बन पाना, बिजली केन्द्र, अस्पताल और अब यह गोठान. अगर समय के रहते शासन अपनी जमीन नहीं खोज पाती है तो भविष्य में गाँव के विकास के लिए बहोत कठिनाई होगी.