रामायण महाभारत का जिक्र कर उच्च न्यायलय ने एसडीएम कोर्ट के फैसले को रखा सुरक्षित, सौतेले बेटों को बताया वृद्धा की देखभाल का ज़िम्मेदार.
महासमुंद जिले के सिंघोड़ा थाना अंतर्गत ग्राम ग्राम खम्हारपाली के निवासी उत्तम कुमार भोई पेशे से शिक्षक है और बच्चों को ज्ञान बाँटते है मगर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर उच्च न्यायलय को उनके ही ज्ञान में कुछ कमी दिखाई दी और और कलयुग के इस शिक्षक को त्रेतायुग के रामायण और द्वापर के महाभारत का ज्ञान दे दिया.
दरअसल बिलासपुर उच्च न्यायलय में याचिकाकर्ता उत्तम कुमार भोई ने एसडीएम के एक आदेश को लेकर उसके ख़िलाफ याचिका डाला था. एसडीएम के आदेशानुसार याचिकाकर्ता को प्रतिमाह 10 हजार रुपये उसकी माँ को गुजारा भत्ता के तौर पर देने थे क्योंकि याचिकाकर्ता द्वारा उसके पिता की मृत्यु के पश्चात उसकी माँ को घर से बेदखल कर दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर दिया गया था.
जिसके बाद वह बेसहारा माँ गाँव से 30 किलोमीटर दुर एक मंदिर में 4 वर्षों से गुजरा कर रही थी. यह देख याचिकाकर्ता के चचेरे भाई मनबोध भोई द्वारा उसकी बड़ी बेसहारा माँ को न्याय देने का फैसला किया था. जिसके बाद याचिकाकर्ता की माँ राजस्व न्यायलय की शरण में जाकर भरण-पोषण दिलाने हेतु आवेदन दिया.
जिसके बाद राजस्व न्यायलय ने द्वारा आदेश दिया गया कि पीड़िता को प्रतिमाह 10 हजार रुपये भरण पोषण के के हिसाब से 6 माह के 60 हजार रुपये दिए जाए. यह बात पीड़िता के पुत्र को पसंद नहीं आई और उसने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर कर दी.
याचिका दायर करते ही उच्च न्यायलय ने सबसे पहले उसे 30 हजार भरने को कहा. मगर याचिकाकर्ता उत्तम कुमार भोई ने 30 हजार भरने की बजाय न्यायलय को गुमराह करने की कोशिश करने लगा. याचिकाकर्ता द्वारा जो बैंक की जमा पर्ची दी गई थी वह फर्जी निकली क्योंकि पर्ची के आधार पर जमा की गई राशि याचिकाकर्ता की माँ के खाते में नहीं आये. जब मामले का खुलाशा हुआ उसके बाद याचिकाकर्ता द्वारा बैंक में सही तरीके से राशि जमा की गई.
प्रकरण के 11 माह बाद जब उच्च न्यायलय ने फैसला सुनाया याचिकाकर्ता की अपील को दुभाग्यपूर्ण बताया और रामायण एवं महाभारत की श्रुति का उल्लेख करते हुए उच्च न्यायलय ने सौतेले बेटों को वृद्धा की देखभाल के लिए ज़िम्मेदार बताया साथ ही एसडीएम कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ता को 2 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया.