किसी कंपनी की ताकत उसके दफ्तरों में लगे हाई-टेक सिस्टम नहीं होते, बल्कि वे लोग होते हैं, जो सपनों को लक्ष्य बनाकर, लक्ष्य को उपलब्धि में बदलने के लिए दिन-रात जुटे रहते हैं।
15 दिन बीत जाने के बाद भी न तो टेंडर लगाया गया और न ही कार्य प्रारंभ किया गया। अधिकारियों की इस लापरवाही और झूठे भरोसे ने ग्रामीणों के धैर्य को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य डॉ. दिवाकर नाथ वाजपेयी उपस्थित रहे। समारोह में 64 शोद्यार्थियों को शोध उपाधि, 92 गोल्ड मेडल एवं 36950 स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि दी गई।